रुद्रपुर,28 अपै्रल (आरएनएस)। जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया की अध्यक्षता में जिला सभागार में मातृ मृत्यु दर को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ मातृ मृत्यु के कारणों और भविष्य में रोकथाम के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई। डीएम ने निर्देश दिए कि पंजीकृत चिकित्सकों की निगरानी में ही प्रसव हों। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने हाई रिस्क गर्भावस्था के मामलों की समय रहते पहचान कर उनकी विशेष निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आशा व एएनएम के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण और नियमित जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। प्रसव के दौरान रेफरल सिस्टम को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के भी निर्देश दिए, ताकि आपात स्थिति में समय पर उपचार मिल सके। उन्होंने पंजीकृत चिकित्सकों की निगरानी में प्रसव नहीं कराने वाले चिकित्सालयों को चिह्नित कर उनका आकस्मिक निरीक्षण करने और अनियमितता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही गृह प्रसव कराने वाली दाइयों की निगरानी रखने और अवैध रूप से प्रसव कराए जाने पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी दिए। डीएम ने स्पष्ट किया कि यदि आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं को निजी चिकित्सालयों में ले जाती पाई जाती हैं तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मातृ मृत्यु दर को कम करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि जनपद में अब तक 18 मातृ मृत्यु के मामले सामने आए हैं, जिनमें से 11 की समीक्षा पहले ही की जा चुकी है, जबकि सात नए मामलों की समीक्षा बैठक में की गई। जांच में प्रसव संबंधी जटिलताएं, एनीमिया (खून की कमी) और समय पर अस्पताल न पहुंच पाना प्रमुख कारण पाए गए। बैठक में सीडीओ दिवेश शाशनी, एसीएमओ डॉ. डीपी सिंह, पीएमएस डॉ. आरके सिंह, सभी चिकित्सा अधीक्षक, डीपीएम हिमांशु, चांद मियां, डीसीएम निधि शर्मा, डीपीओ मोहम्मद आमिर खान और सितारगंज, बाजपुर व गदरपुर के ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक उपस्थित रहे।
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