बिलासपुर 30 अप्रैल (आरएनएस) “जब सुर गूंजे, कदम थिरके और सम्मान बरसा… तो बिलासपुर में जाग उठी नई चेतना!” अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस के मौके पर 29 अप्रैल 2026 को बिलासपुर के चेतना हॉल में ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने कला, संस्कृति और सामाजिक जागरूकता को एक मंच पर जीवंत कर दिया, न्यूज़ हब इनसाइट केयर फाउंडेशन (NHICF) और बिलासपुर पुलिस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित

“चेतना महोत्सव एवं प्रशिक्षण कार्यशाला” ने शहर को ऊर्जा, उत्साह और संदेश से भर दिया, कार्यक्रम में एसएसपी रजनेश सिंह, कलेक्टर संजय अग्रवाल, जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल, कुलपति डॉ. विनय कुमार पाठक, पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ. चंद्रभूषण बाजपेयी, प्रो. श्याम लाल निराला, कथक गुरु वासन्ती वैष्णव और सुनील वैष्णव सहित कई गणमान्य हस्तियों की मौजूदगी ने आयोजन को गरिमा दी, मंच पर जैसे ही युवा कलाकार उतरे, माहौल तालियों से गूंज उठा, कथक की मोहक प्रस्तुतियों में प्राख्या खंडेलवाल, नित्या शुक्ला, केतन सिंह राठौर, अश्विका साव और उद्धव ठक्कर ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं भरतनाट्यम की प्रस्तुति में श्रावणी इज्जू ने अपनी अदाओं से सबका दिल जीत लिया, प्राची सोनवानी की विशेष प्रस्तुति ने कार्यक्रम में अलग ही रंग भर दिया, इसके बाद सम्मान समारोह ने आयोजन को नई ऊंचाई दी जहां “चेतना नृत्य शिरोमणि 2026” से नित्या शुक्ला, अश्विका साव और प्राची सोनवानी को नवाजा गया, “चेतना कथक नटराज 2026” से केतन सिंह राठौर और उद्धव ठक्कर सम्मानित हुए, जबकि “चेतना भरतनाट्यम रत्न 2026” का सम्मान श्रावणी इज्जू को मिला, खास आकर्षण तब बना जब “चेतना हीरो 2026” से राष्ट्रपति पदक से सम्मानित शैलेंद्र सिंह ठाकुर को सम्मानित किया गया और “चेतना स्पोर्ट्स आइकन 2026” के रूप में रुद्र प्रताप सिंह (हरी) को नवाजा गया, वहीं “चेतना रत्न” से मास्टर तनिष्क वर्मा को सम्मानित कर नई प्रतिभाओं को मंच दिया गया, कार्यक्रम का संचालन शगुफ्ता परवीन ने प्रभावशाली अंदाज में किया और अंत में पंकज खंडेलवाल व मयूरी खंडेलवाल ने सभी अतिथियों व प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया, इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में एएसपी पंकज पटेल, एएसपी मधुलिका सिंह, यातायात एएसपी रामगोपाल करियारे, डीएसपी मंजुलया केरकेट्टा, आरआई भूपेंद्र गुप्ता और NHICF टीम के सुरेंद्र वर्मा, दीपक मिश्रा और तरुण मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही, यह महोत्सव सिर्फ नृत्य और सम्मान तक सीमित नहीं रहा बल्कि समाज में जागरूकता, समरसता और सकारात्मक बदलाव का मजबूत संदेश भी देकर गया। बहरहाल, चेतना हॉल में गूंजे सुर और थिरके कदम सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं थे, बल्कि यह संकेत थे कि जब कला और समाज साथ चलते हैं तो बदलाव की असली चेतना जन्म लेती है।


