वडोदरा 04 May, (Rns): गुजरात के वडोदरा स्थित महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय (MSU) ने अपने पाठ्यक्रम (सिलेबस) में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऐलान किया है कि अब क्लासरूम में छात्रों को ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ (RSS) के इतिहास और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन पर आधारित ‘मोदी तत्व’ की विस्तार से पढ़ाई करवाई जाएगी। इन नए विषयों को शामिल करने के पीछे प्रशासन का मकसद छात्रों को देश की वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक कार्यप्रणाली से बेहतर ढंग से जोड़ना है।
‘मोदी तत्व’ में पीएम के व्यक्तित्व और ‘मेक इन इंडिया’ पर फोकस
इस नए पाठ्यक्रम के तहत छात्रों के लिए ‘मोदी तत्व’ नाम का एक विशेष विषय शामिल किया गया है, जो पूरी तरह से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व और उनकी कार्यशैली पर आधारित है। इसमें छात्रों को पीएम मोदी के नेतृत्व क्षमता के गुण, उनके प्रभावशाली व्यक्तित्व और उनके काम करने के खास तरीकों के बारे में गहराई से पढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही, समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से इस बात का भी विश्लेषण किया जाएगा कि ‘मेक इन इंडिया’ जैसे बड़े सरकारी अभियानों ने भारतीय समाज पर क्या और कितना प्रभाव डाला है।
RSS के इतिहास और राष्ट्रवाद की दी जाएगी विस्तृत शिक्षा
विश्वविद्यालय के सोशियोलॉजी (समाजशास्त्र) विभाग के छात्र अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जन्म, उसके विस्तृत इतिहास और समाज के सांस्कृतिक उत्थान में संघ के योगदान को भी समझेंगे। इस विषय के तहत विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, पर्यावरण संरक्षण और देश के स्वतंत्रता संग्राम में संघ की भूमिका पर चर्चा होगी। इतना ही नहीं, छात्रों को यह भी सिखाया जाएगा कि एक नॉन-प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन के सफल मैनेजमेंट के लिए संघ की अनुशासित कार्यशैली को समझना क्यों महत्वपूर्ण है।
सावरकर, अंबेडकर और शिवाजी महाराज के विचार भी सिलेबस में शामिल
एमएस यूनिवर्सिटी के ‘बोर्ड ऑफ स्टडीज’ ने कुल चार नए कोर्सेज को अपनी आधिकारिक मंजूरी दी है, जिनमें देश के महान नायकों और विचारकों को प्रमुख जगह दी गई है। अब छात्र वीर सावरकर, महर्षि अरविंद और डॉ. बीआर अंबेडकर के विचारों का भी गहराई से अध्ययन करेंगे। इसके अलावा छत्रपति शिवाजी महाराज और महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ के कुशल शासन व उनके सामाजिक सुधारों को भी पढ़ाया जाएगा। इसी कड़ी में एक चौथा विषय पूरी तरह से ‘राष्ट्रवाद’ पर केंद्रित रखा गया है, जिसमें राष्ट्र व राज्य की परिभाषा और राष्ट्रवाद पर भारतीय समाजशास्त्रियों के विचारों पर मंथन किया जाएगा।
पाठ्यक्रम में इस बड़े बदलाव पर क्या बोला विश्वविद्यालय प्रशासन?
सिलेबस में किए गए इस अहम बदलाव पर विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के प्रमुख डॉ. वीरेंद्र सिंह ने प्रशासन का पक्ष रखा है। उनका कहना है कि इन नए विषयों के जुड़ने से छात्र वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिवेश को कहीं ज्यादा बेहतर तरीके से समझ सकेंगे। उन्होंने बताया कि सरकारी थिंक टैंक ‘नीति आयोग’ की हालिया शोध परियोजनाओं में छात्रों को सरकारी पहलों के साथ जुड़ते हुए देखा गया है, इसलिए इन अहम विषयों को औपचारिक रूप से सिलेबस का हिस्सा बनाना एक स्वाभाविक और प्रगतिशील कदम माना जा रहा है।

