कोरबा, 05 मई (आरएनएस)। मोबाइल खोया, उम्मीद भी खो गई और तभी अचानक एक कॉल—आपका फोन मिल गया है, कोरबा में ये कोई फिल्मी सीन नहीं बल्कि हकीकत बनी जब 75 लोगों के चेहरे एक साथ खिल उठे, वो फोन जो महीनों पहले गायब हो चुके थे अचानक फिर उनके हाथों में थे और इसके पीछे था एक सटीक ऑपरेशन सजग कोरबा, सतर्क कोरबा, कहानी शुरू होती है उन शिकायतों से जो धीरे-धीरे साइबर पुलिस थाना कोरबा तक पहुंचती रहीं, हर शिकायत के पीछे एक बेचैनी और एक उम्मीद थी, और फिर मैदान में उतरी साइबर टीम जिसने CEIR पोर्टल को हथियार बनाया और तकनीक को ढाल, एक-एक नंबर ट्रेस हुआ, लोकेशन बदली,
सिग्नल घूमे और फिर अलग-अलग जिलों और राज्यों में बिखरे मोबाइलों का नेटवर्क खुलने लगा, जैसे कोई अदृश्य जाल धीरे-धीरे सामने आ रहा हो, पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले, नीतिश ठाकुर और नगर पुलिस अधीक्षक प्रतीक चतुर्वेदी की रणनीति के बीच साइबर थाना प्रभारी ललित चंद्रा और उनकी टीम ने लगातार ट्रैकिंग जारी रखी, और फिर वो पल आया जब एक-एक कर मोबाइल बरामद होने लगे, Apple, Samsung, Oppo, Vivo, Redmi, Realme और OnePlus जैसे ब्रांड, कुल कीमत करीब 11.50 लाख रुपये, ये सिर्फ गैजेट नहीं थे बल्कि लोगों की यादें, काम और जुड़ी हुई जिंदगी थी, आज साइबर थाना परिसर में जब ये मोबाइल उनके असली मालिकों को लौटाए गए तो हर चेहरे पर राहत साफ दिख रही थी, कई लोगों ने कहा हमें लगा था अब कभी नहीं मिलेगा लेकिन कोरबा पुलिस ने उम्मीद वापस लौटा दी,
कहानी यहीं खत्म नहीं होती, असली ट्विस्ट ये है कि पिछले 4 महीनों में इसी टीम ने 200 से ज्यादा मोबाइल इसी तरह ढूंढकर वापस दिलाए हैं, यानी ये कोई एक्शन नहीं बल्कि लगातार चल रही डिजिटल जंग है, उप निरीक्षक अजय सोनवानी और साइबर टीम की भूमिका ने इस ऑपरेशन को मुकाम तक पहुंचाया, जहां तकनीक और टीमवर्क ने मिलकर भरोसे को फिर से जिंदा किया, और अब पुलिस का संदेश साफ है अगर मोबाइल खो जाए तो ष्टश्वढ्ढक्र पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें और तुरंत कार्रवाई होगी, बहरहाल ये सिर्फ मोबाइल वापसी नहीं बल्कि भरोसे की वापसी है क्योंकि जब सिस्टम जागता है तो खोया हुआ भी वापस मिल जाता है।
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