लखनऊ,06 मई (आरएनएस)। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में करारी हार को देखते हुए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने फिलहाल राजनीतिक परामर्श फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पीएसी) से दूरी बना ली है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए आई-पीएसी के साथ समझौता करना चाह रहे थे, लेकिन अब बातचीत रोक दी गई है। पार्टी अपने चुनाव प्रचार प्रबंधन व्यवस्था को लेकर महीनों से चर्चा कर रही थी। हालांकि, इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की थी।
सूत्रों ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि समाजवादी पार्टी ने इस साल की शुरूआत में समझौता किया था, जो अब रद्द कर दिया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि संगठन ने उत्तर प्रदेश में अपना कार्यालय बंद कर दिया है और लगभग 30-40 नियुक्त लोगों को काम पर न आने के लिए कहा गया है। आई-पीएसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्वीकार किया कि अखिलेश के साथ समझौता करवाने में ममता ने अहम भूमिका निभाई थी।
सूत्रों का कहना है कि समाजवादी पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेतृत्व के कहने पर उत्तर प्रदेश को लेकर बनाए गए अभियान का आई-पीएसी का प्रस्तुतिकरण देखा था, लेकिन कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ था। बताया जा रहा हैकि उत्तर प्रदेश के चुनावी अभियान का नेतृत्व करने के लिए निदेशक विनेश चंदेल को चुना जाना था, लेकिन उनकी गिरफ्तारी ने योजना को खतरे में डाल दिया। बताया जा रहा है कि अखिलेश समझौते के इच्छुक नहीं थे।
अखिलेश ने ममता बनर्जी के कहने पर आई-पीएसी का प्रेजेंटेशन देखा था, वह इच्छुक नहीं थे। अखिलेश और ममता के बीच काफी मजबूत राजनीतिक संंबंध हैं। बंगाल में टीएमसी और तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कडग़म की हार से अखिलेश का मनोबल टूट गया। दोनों राज्यों में अभियान का जिम्मा आई-पीएसी के पास था। इसके अलावा, बंगाल में कोयला तस्करी मामले में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी और गिरफ्तारी से भी अखिलेश का मन खराब हुआ।
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