सियोल, 07 मई। दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल के एक बौद्ध मंदिर में पहली बार मानवरूपी रोबोट भिक्षु को पेश किया गया है। गाबी नाम का यह रोबोट बुद्ध जयंती समारोह से पहले आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुआ। रोबोट ने भिक्षुओं के साथ मंत्र पढ़े, लोगों को प्रणाम किया और सवालों के जवाब भी दिए। पारंपरिक भिक्षु वस्त्र पहने इस रोबोट को खास तौर पर युवा पीढ़ी को बौद्ध धर्म और आधुनिक तकनीक से जोडऩे के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
4 फुट ऊंचे इस रोबोट को चीन के यूनिट्री- जी1 प्लेटफॉर्म पर बनाया गया है। कार्यक्रम के दौरान एक भिक्षु ने उससे पूछा कि क्या वह बुद्ध और बौद्ध शिक्षाओं का पालन करेगा। इसके जवाब में गाबी ने हां कहा। रोबोट ने प्रार्थना में हाथ जोड़े, मंदिर की परिक्रमा की और धार्मिक माला भी ग्रहण की। हालांकि, पारंपरिक धूप जलाने की रस्म इसमें शामिल नहीं की गई। मंदिर के अनुसार गाबी नाम करुणा और बुद्ध के विचारों से जुड़ा हुआ है।
मंदिर प्रशासन ने गाबी के लिए धार्मिक नियम तैयार किए हैं। इनमें जीवन का सम्मान करना, किसी को नुकसान न पहुंचाना और गलत जानकारी से बचना जैसी बातें शामिल हैं। रोबोट को बैटरी जरूरत से ज्यादा चार्ज नहीं करने का निर्देश दिया गया है। बताया गया कि इन नियमों को बनाने में एआई चैटबॉट की मदद ली गई। मंदिर का मानना है कि नई तकनीक की मदद से धर्म और समाज के बीच जुड़ाव को मजबूत किया जा सकता है।
एआई और रोबोट को धार्मिक कामों से जोडऩे का यह पहला मामला नहीं है। जापान के क्योटो विश्वविद्यालय में भी बुद्धरॉइड नाम का एआई रोबोट तैयार किया गया है। यह रोबोट लोगों से बातचीत कर सकता है और आध्यात्मिक सवालों के जवाब देता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इसका मकसद भविष्य में बौद्ध शिक्षाओं को सुरक्षित रखना है। अब एशिया के कई देशों में धर्म और तकनीक को साथ जोडऩे की कोशिशें तेज हो रही हैं।
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