देहरादून,07 मई (आरएनएस)। ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में ‘कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी और सतत खाद्य प्रणालियों में उभरती तकनीकें’ विषय पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हो गया। मुख्य अतिथि और नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत ने सम्मेलन का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि बढ़ती जनसंख्या और जलवायु परिवर्तन के दौर में प्रिसिजन एग्रीकल्चर और एडवांस तकनीकें समय की सबसे बड़ी जरूरत हैं। यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. वी.के. सारस्वत ने कहा कि वर्ष 2050 तक विश्व की जनसंख्या 10 अरब पहुंच जाएगी, जिससे खाद्य सुरक्षा एक गंभीर चुनौती होगी। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद हमने उत्पादन तो बढ़ाया, लेकिन पोषण गुणवत्ता प्रभावित हुई। अब वैज्ञानिकों को फसलों की पोषण गुणवत्ता बनाए रखते हुए उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। आईओटी और एआई जैसी तकनीकें इसमें मील का पत्थर साबित होंगी। डीआरडीओ के महानिदेशक डॉ. उपेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि डेटा माइनिंग और क्वांटम कम्प्यूटिंग जैसी तकनीकें बीमारियों की भविष्यवाणी और मानसून के सटीक विश्लेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कुलपति डॉ. नरपिंदर सिंह ने भी शोधकर्ताओं से नई तकनीकों के अनुरूप खुद को तैयार करने का आह्वान किया। इस दौरान डॉ. सारस्वत और डॉ. यू.के. सिंह ने रुद्राक्ष के पौधे लगाए। आयोजन में प्रो-चांसलर डॉ. राकेश कुमार शर्मा, प्रो-वीसी डॉ. संतोष एस सर्राफ, कुलसचिव डॉ. नरेश कुमार शर्मा, बायोसाइंस हेड डॉ. मनु पंत और हॉस्पिटैलिटी हेड डॉ. अमर डबराल आदि मौजूद रहे।
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