बिलासपुर, 09 मई (आरएनएस)। व्हाट्सएप कॉल पर खुद को “PSI संजय” बताने वाले साइबर ठगों ने एक महिला को ऐसा डराया कि वह घंटों तक मोबाइल स्क्रीन के सामने डिजिटल अरेस्ट में कैद रही और देखते ही देखते उसकी जिंदगीभर की जमा पूंजी 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपये अलग-अलग खातों में पहुंच गई। पुलिस, ईडी, आरबीआई और सुप्रीम कोर्ट का नाम लेकर रचा गया यह हाईटेक डर का खेल आखिरकार बिलासपुर साइबर पुलिस की तकनीकी जांच में बेनकाब हो गया और अंतर्राज्यीय साइबर गिरोह के दो आरोपी राजस्थान से गिरफ्तार कर लिए गए। रेंज साइबर थाना बिलासपुर में दर्ज अपराध क्रमांक 02/2026 में धारा 318(4), 308(6), 3(5) बीएनएस तथा 66C और 66D आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। मामले में पीडि़ता के परिवार ने शिकायत दर्ज कराई कि उनकी माता को व्हाट्सएप कॉल कर आरोपी ने खुद को “PSI संजय” बताया और कहा कि उनका नाम एक आतंकवादी संगठन से जुड़े गंभीर मामले में सामने आया है तथा उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए महिला को कई घंटों तक तथाकथित डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। आरोपियों ने पुलिस, ईडी, आरबीआई और सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई का भय दिखाकर लगातार मानसिक दबाव बनाया। महिला को धमकी दी गई कि अगर उसने परिवार के किसी सदस्य से संपर्क किया तो उसके बेटे और अन्य परिजनों को भी केस में फंसा दिया जाएगा। ठगों ने फर्जी सरकारी नोटिस, ईडी जांच दस्तावेज, सुप्रीम कोर्ट आदेश और आरबीआई नोटिस भेजकर ऐसा माहौल बनाया कि महिला को लगा वह वास्तव में किसी बड़ी जांच एजेंसी के शिकंजे में फंस चुकी है। लगातार भय और मानसिक प्रताडऩा के कारण महिला आरोपियों के जाल में फंसती चली गई और अलग-अलग तिथियों में कुल 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। हैरानी की बात यह रही कि रकम लेने के बाद भी आरोपी केस खत्म करने के नाम पर अतिरिक्त 50 लाख रुपये मांग रहे थे। जब पीडि़ता ने पूरी बात अपने बेटे को बताई तब इस हाईप्रोफाइल साइबर ठगी का खुलासा हुआ और तत्काल रेंज साइबर थाना बिलासपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। शिकायत मिलते ही साइबर पुलिस ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की गहराई से तकनीकी जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम कई लेयर बैंक खातों में घुमाई गई थी ताकि असली नेटवर्क तक पहुंचना मुश्किल हो सके। बैंकिंग ट्रेल और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम राजस्थान के चुरू जिले तक पहुंची और वहां से दो आरोपियों को हिरासत में लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रूपेन्द्र सिंह पिता संपत सिंह उम्र 21 वर्ष निवासी ग्राम पोती थाना रतननगर जिला चुरू राजस्थान तथा विशाल सिंह पिता जीवराज सिंह उम्र 20 वर्ष निवासी ग्राम पोती थाना रतननगर जिला चुरू राजस्थान के रूप में हुई। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते उपलब्ध कराए और ठगी की रकम निकालकर दूसरे लोगों तक पहुंचाई। बदले में उन्हें कमीशन दिया जाता था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। दोनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर बिलासपुर लाया गया है और अब साइबर पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों, बैंक खातों और डिजिटल ट्रेल की गहराई से जांच कर रही है। पूरी कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक गोपाल गर्ग, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह और नोडल अधिकारी गगन कुमार के निर्देशन में रेंज साइबर थाना बिलासपुर की टीम ने अंजाम दी। फिलहाल यह मामला एक बार फिर साबित कर रहा है कि डिजिटल अरेस्ट नाम का डर असल में साइबर ठगों का नया हथियार है और एक छोटी सी चूक आपकी पूरी जिंदगी की कमाई निगल सकती है।
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