चित्रकूट 12 मई (आरएनएस)। भारतीय समाज में आजीविका का प्रमुख साधन गोपालन और पशुपालन रहा है । जिसके प्रयोग से खेती में गोबर की खाद से बिना केमिकल की जीवाश्म खाद से रोग रहित खाद्यान्न पैदा होते थे। गायों से सब कुछ जैसे दूध ,दही, घी, गोमूत्र से बहुत सी दवाएं पंचगव्य और खेती के लिए खाद हमेशा बिना प्रयास के उपलब्ध रहती थी। इसके साथ ही बायो गोबर गैस संयंत्रों के उपयोग को बढ़ाकर वर्तमान एलपीजी गैस के संकट का समाधान निकाला जा सकता है। जिसके लिए अब हमें गोपालन और पशुपालन को बढ़ाने की ओर पहले की तरह लौटना होगा।
नगर के वरिष्ठ समाजसेवी साहित्यकार रामलाल द्विवेदी प्राणेश ने संतों के साथ जिलाधिकारी से भेंट कर हस्ताक्षरित आवेदन देकर गौशालाओं के लाभकारी बनाने और गोपालन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से Óओहन नदी के उद्गम ओहन बांध के पास कुछ दूरी पर Óकाफी बड़ी लाभकारी एवं आत्मनिर्भर गौशालाÓ बनाने की मांग की है जहां मुख्यमंत्री जी की मंशा के अनुरूप Óटूरिज्म प्लेसÓ बनने की भी संभावनाएं पाई जाती है।
जिलाधिकारी ने बंजर जमीन देखकर अनुरूप कार्यवाही करने का आश्वासन दिया। गाय के लाभों की लंबी श्रृंखला के क्रम में रामलाल द्विवेदी प्राणेश कवि ने बताया कि यूएई, सऊदी अरब, कुवैत आदि खाड़ी देशों में गोबर की खाद की खजूर की खेती के लिए बड़ी मांग है । भारत से सालाना 400 करोड रुपए का गोबर उत्पाद कंपोस्ट वर्मी खाद इन देशों को निर्यात किया जा रहा है । सरकार को जनता से गाय के गोबर की खरीद करके गोपालन /पशुपालन को बढ़ावा देना चाहिए। गोशालाओं में गोबर से Óकंपोस्ट वर्मी खाद , शव दाह के लिए लकड़ी का उपयोग बचानेÓ के लिए Óकंडे ,दीपक, खिलौने अगरबत्ती ,पेंटÓ Óछिड़काव के लिए गोनाइल फिनायलÓ Óऔर दवाओं के लिए गोमूत्र व पंचगव्यÓ इनका प्रयोग लाभदायक होगा। देसी गाय के दूध में ।2 टाइप का प्रोटीन बहुत लाभकारी है जबकि जर्सी गाय के दूध में ।1 टाइप का प्रोटीन पाए जाने से विदेश में बच्चों के लिए हानिकारक मानकर प्रतिबंधित किया गया है।
सवा लाख गायों वाली पचमेड़ा राजस्थान की गौशाला तथा कान्हा उपवन गौशाला की तर्ज पर गौशाला को बेहद लाभकारी बनाते हुए ओहन बांध के पास बड़ी गौशाला खोलने की प्रभावी कार्यवाही करने की प्रार्थना की है।
उन्होंने बताया कि Óअमेरिका ने कैंसर व अन्य बीमारियों के इलाज और औषधि उपयोग के लिए गोमूत्र पर शोध आदि के लिए पेटेंट के लिए आवेदन किया हैÓ । जापान जैसे उन्नतशील देश भी गोबर से बायो ईंधन और औद्योगिक उत्पादों सहित राकेट ईंधन के लिए शोध कर रहा है।
मांग किया है कि नेपाल की तर्ज पर देवी स्वरूपा पवित्र और सब प्रकार से लाभकारी गाय माता को Óराष्ट्रीय पशु या राष्ट्रीय धरोहरÓ घोषित किया जाए। बछड़ों और बैलों के उपयोग के लिए छूट की बैलगाड़ी सरकार द्वारा प्रदान करने से ग्रामीण अंचल में भाड़ा ढोने के लिए आजीविका का साधन हो सकती है। भारत सरकार से अपेक्षा की है कि खाद की सब्सिडी कुछ कम करके गोपालन पशुपालन को बजट में प्रोत्साहन देकर बढ़ावा दिया जाए क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन आजीविका का प्रमुख साधन है ।
नेपाल भूटान (बौद्ध बहुल म्यांमार थाईलैंड बहुतायत में) देशों में गाय को पूज्य मान करके पूर्णत: गो हत्या में प्रतिबंध लगाया गया है । करुणामयि दयामयी सब प्रकार से उपयोगी गाय की हत्या में पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रार्थना पत्र भेजकर शासन प्रशासन से मांग की है।
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