अजय दीक्षित
पश्चिमी बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पांडिचेरी के विधानसभा चुनाव के परिणाम को लेकर विपक्ष में भ्रम की स्थिति है क्योंकि कांग्रेस सहित अनेक विपक्षी दलों को लगता है कि भारतीय जनता पार्टी लोकसभा चुनाव हारना काफी मुश्किल है। राजनीतिक विश्लेषकों आशुतोष, जयंत घोषाल, राजीव रंजन,का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद हुए विधानसभा चुनाव में हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र,बिहार, असम, उड़ीसा, और अब पश्चिमी बंगाल में जिस तरह भारतीय जनता पार्टी ने एक तरफा जीत हासिल की है उससे तो लगता है कि 2029 लोकसभा चुनाव का रास्ता उसके लिए साफ हो गया है क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र, पश्चिमी बंगाल, उत्तर प्रदेश, हरियाणा,में भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन 240 सीट पर आकर टिक गया था। लेकिन अब वह बात नहीं क्योंकि पश्चिमी बंगाल विधानसभा चुनाव जीतने बाद उसकी 42 लोकसभा सीट पर उसे अब आसानी होगी ।
आशुतोष कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी और अन्य पार्टियां में आइडियोलॉजी का फर्क है। भाजपा चुनाव इस लिए लड़ती है कि वह आरएसएस और अपनी एजेंडे को लागू कर सके चाहे वह अनुच्छेद 370 का मामला हो या राममंदिर का मसला,।अब भाजपा के समक्ष बांग्लादेशी घुसपैठ, कॉमन सिविल कोड, जैसे बड़े मामले है । जिसमें एक सीट परिसीमन, महिला आरक्षण संबंधी विधेयक संसद से पारित कराने है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने अनुसार एक बृहद शिक्षा नीति बनाना चाहता है। दूसरी ओर विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है क्योंकि वे सरकार में सत्ता करने वाला खेल खेलते हैं। यद्यपि दक्षिण भारत में तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना में अलग अलग पार्टियों का शासन है लेकिन उनके पास भी हिंदी ब केंद्रीय सरकार का मुद्दा है क्योंकि वे चाहते हैं कि भारत लोकतांत्रिक देश में राज्यों की भूमिका अधिकतर तथ्यों में है।वे रक्षा, वित्त, दूरसंचार,विदेश मामलों तक केंद्रीय सरकार को जिम्मेदार बनाते हैं। लेकिन भारतीय जनता पार्टी केंद्रीय भूमिका की पक्षधर है।
राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस की सरकार आजादी के बाद लगभग साठ साल रही लेकिन उद्देश्य पूर्ण कार्य जवाहरलाल नेहरू, श्री मति इंदिरा गांधी,ने किया बाद में नरसिंह राव सरकार ने भी उदारीकरण नीति बनाई जिससे देश का वित्तीय विकास हुआ , रोजगार का सृजन हुआ। लेकिन उसके बाद अटल बिहारी वाजपेई की सरकार ने भारतीय जनता पार्टी सरकार की नींव रखी थी जिसमें दक्षिण पंथी विचारों को अपनाया गया। लेकिन 2004से ,2014 तक मनमोहन सिंह सरकार ने उद्देश्य हीन ही सरकार चलाई जिसमें भ्रष्टाचार का बोलबाला था। राज्यों में जैसे पश्चिमी बंगाल में 37 साल लेफ्ट पार्टियों की सरकार रही थी उस कालखंड में कोलकाता, पूरे राज्य का ओद्योगिक ढांचा समाप्त हो गया था।टीएमसी ने 15 वर्ष उसे खड़ा करने कोई प्रयास नहीं किया।जुट उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ। इस प्रकार बीएसपी की उत्तर प्रदेश में 2002 से 2007 तक बिना किसी उद्देश्य के चली ।बाद में समाजवादी पार्टी की सरकार 2007से 2012 तक भी कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं हुआ । भारत के राज्यों में गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, मध्य प्रदेश, राजस्थान,ने उल्लेखनीय कार्य किया।
कांग्रेस, ,बीजेडी,डीएमके, तुड़मूल कांग्रेस,सपा , टीवीके,आप,एआईडीएमके,राजेडी,सीपीई,सीपीएम, टीआरएस, सहित अनेक पार्टियां ऐसी है कि कुनवा चला रहा है । इन पार्टियां ने मुस्लिम तुष्टिकरण को हवा दी है । जिसमें सपा, डीएमके, तुड़मूल , कांग्रेस,राजद,ने तो मुसलमानों को जैसे वोट बैंक ही बनाया।।इन पार्टियां के प्रमुखों ने अकूत संपत्ति अर्जित की है।2027 में उत्तर प्रदेश,पंजाब, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होने है ।जिसमें से हिमाचल प्रदेश को छोड़कर सभी राज्यों में भारतीय जनता पार्टी सरकारें है।
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