नारायणपुर, 14 मई (आरएनएस)। जंगलों के बीच बसे गांवों में जब पुलिस चौपाल लेकर पहुंची तो सिर्फ कानून की बातें नहीं हुईं, बल्कि भरोसे, सुरक्षा और बदलाव की नई कहानी भी लिखी गई। नारायणपुर पुलिस ने माड़ मैत्री चौपाल के जरिए ग्रामीणों, युवाओं और महिलाओं से सीधा संवाद कर यह संदेश दिया कि अब पुलिस सिर्फ कानून लागू करने वाली ताकत नहीं, बल्कि गांवों की साथी और संरक्षक बनकर मैदान में उतरी है। पुलिस अधीक्षक रॉबिंसन गुडिय़ा के निर्देशन में जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में आयोजित इस अभियान के तहत थाना एडका के ग्राम तेरदुल, थाना भरंडा के ग्राम बिंजली, थाना सोनपुर के ग्राम सोनपुर और थाना ओरछा के ग्राम कुड़मेल में विशेष चौपाल कार्यक्रम लगाए गए, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, सामाजिक प्रमुख और युवा मौजूद रहे। चौपाल में ग्रामीणों को नए कानूनों, उनके अधिकारों और कानूनी जागरूकता की जानकारी दी गई, वहीं माड़ मैत्री कार्यक्रम के उद्देश्य और इसके थीम वाक्य विग्रह से विश्वास को सरल भाषा में समझाया गया। पुलिस अधिकारियों ने युवाओं को शिक्षा, खेल और रोजगार से जुडऩे के लिए प्रेरित किया, साथ ही नशे से दूरी बनाने, स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और यातायात नियमों का पालन करने की अपील की।
साइबर अपराध, ऑनलाइन ठगी और सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर भी ग्रामीणों को सतर्क किया गया ताकि गांवों तक पहुंच रहे डिजिटल खतरों से लोग समय रहते बच सकें। कार्यक्रम के दौरान कुछ युवाओं को माड़ मित्र के रूप में नामित किया गया, जिन्हें गांव और पुलिस के बीच कड़ी बनकर काम करने, असामाजिक गतिविधियों की सूचना देने, सामाजिक कार्यों में भागीदारी निभाने और गांव की समस्याओं को पुलिस तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। पुलिस ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि किसी भी समस्या, शिकायत या खतरे की स्थिति में नारायणपुर पुलिस हर समय उनके साथ खड़ी रहेगी। चौपाल में ग्रामीणों ने भी पुलिस के प्रति सकारात्मक विश्वास जताया और ऐसे आयोजनों को गांवों के लिए जरूरी बताया। बहरहाल, नक्सल प्रभाव वाले इलाकों में भरोसे की यह चौपाल सिर्फ संवाद नहीं, बल्कि पुलिस और जनता के बीच बनती नई साझेदारी की मजबूत तस्वीर बनकर सामने आ रही है।
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