रांची 14 मई (आरएनएस)। भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषा को राजभाषा का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में केंद्रीय सरना समिति भारत की ओर से प्रेस क्लब रांची में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केंद्रीय सरना समिति भारत के अध्यक्ष एवं ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य नारायण उरांव ने कहा कि झारखंड विभिन्न जाति, धर्म और भाषाओं का राज्य है तथा यहां रहने वाले सभी समुदायों और भाषाओं का सम्मान किया जाता है। उन्होंने कहा कि भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को लेकर राज्य में लगातार चर्चाएं हो रही हैं। ये भाषाएं मूल रूप से बिहार की भाषाएं हैं और उनकी उत्पत्ति जिस क्षेत्र में हुई है, उन्हें वहीं महत्व मिलना चाहिए। झारखंड सरकार और सभी राजनीतिक दलों को राज्य की मूल क्षेत्रीय एवं आदिवासी भाषाओं को संरक्षण और बढ़ावा देने की दिशा में काम करना चाहिए। नारायण उरांव ने कहा कि यदि झारखंड में भोजपुरी, मगही और अंगिका को राजभाषा का दर्जा देने की दिशा में कोई पहल की जाती है तो सभी आदिवासी संगठन इसका पुरजोर विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि झारखंड अलग राज्य आदिवासी पहचान, संस्कृति और अस्मिता की रक्षा के उद्देश्य से बना है, इसलिए यहां की क्षेत्रीय और आदिवासी भाषाओं को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और यह कदम राज्य की भाषा, संस्कृति और अस्मिता के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगीता कच्छप, सुनील कच्छप, माधव कच्छप, प्यारी उरांव, लाली कच्छप, जोसफीना उरांव, सोमनाथ उरांव, लक्ष्मण तिर्की, सुरेश कच्छप, बुधवा उरांव, चरकू उरांव, अनिमा खडिय़ा, सुखदेव उरांव समेत कई लोग उपस्थित थे।
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