लखनऊ, ( आरएनएस )14 मई 2026। प्रदेश के आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एमओएस) डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु ने आयुष चिकित्सा सेवाओं को और प्रभावी तथा मरीज-केंद्रित बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित की जाए और मरीजों को उपचार के लिए किसी प्रकार की असुविधा न होने पाए। उन्होंने आयुष महाविद्यालयों में निर्माणाधीन छात्रावासों के कार्य समयबद्ध तरीके से पूर्ण कराने तथा गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।एनेक्सी भवन के सभागार में गुरुवार को आयोजित वर्चुअल समीक्षा बैठक में मंत्री ने प्रदेश के राजकीय आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक और यूनानी मेडिकल कॉलेजों एवं चिकित्सालयों के प्रधानाचार्यों तथा 50 शैय्यायुक्त आयुष एकीकृत चिकित्सालयों के मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों के साथ विभागीय व्यवस्थाओं की समीक्षा की।बैठक में मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आयुष महाविद्यालयों में निर्माणाधीन छात्रावासों का कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा कराया जाए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए और प्रधानाचार्य समय-समय पर निर्माण स्थलों का निरीक्षण करें। मानक के अनुरूप कार्य न होने अथवा लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।डॉ. दयालु ने अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि जिन दवाओं की मांग अधिक है और जो सामान्य रूप से अधिक उपयोग में आती हैं, उनकी उपलब्धता प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि मरीजों के उपचार में दवा की कमी किसी भी स्थिति में बाधा नहीं बननी चाहिए।मंत्री ने चिकित्सकों को ओपीडी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि अधिक से अधिक मरीजों का उपचार किया जाए और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से स्वास्थ्य शिविर लगाकर आयुष चिकित्सा पद्धति को जन-जन तक पहुंचाया जाए। उन्होंने चिकित्सकों को निर्देशित किया कि ओपीडी में आने वाले मरीजों को बाहर की दवा लिखने से बचें और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करें।आईपीडी सेवाओं की समीक्षा करते हुए मंत्री ने कहा कि भर्ती मरीजों का गुणवत्तापूर्ण उपचार किया जाए, ताकि वे जल्द स्वस्थ होकर घर लौट सकें। उन्होंने अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर (ओटी) व्यवस्था को मजबूत करते हुए अधिक से अधिक माइनर सर्जरी किए जाने पर जोर दिया। साथ ही कहा कि ओपीडी, सर्जरी और स्वास्थ्य शिविरों के संचालन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शीर्ष तीन चिकित्सालयों को सम्मानित भी किया जाएगा।बैठक में प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार ने विभागीय प्रगति की जानकारी देते हुए मंत्री को आश्वस्त किया कि उनके निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा। इस दौरान निदेशक आयुर्वेद डॉ. नारायण दास, निदेशक होम्योपैथिक डॉ. पी.के. सिंह, निदेशक यूनानी प्रो. जमाल अख्तर सहित प्रदेश के सभी आयुष महाविद्यालयों एवं चिकित्सालयों के प्रधानाचार्य, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और वरिष्ठ अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

