-मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल समेत सभी चिकित्सालयों के डॉक्टर ले रहे एनपीए
-स्वास्थ्य विभाग ने कई वर्षों से नहीं चलाया चेकिंग के लिए अभियान
अयोध्या 14 मई (आरएनएस)। शासन-प्रशासन के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए जिले के कई सरकारी चिकित्सक धड़ल्ले से प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं। एक तरफ सरकार से नॉन प्रैक्टिस अलाउंस (एनपीए) ले रहे हैं तो दूसरी तरफ मरीजों की जेब पर डाका भी डाल रहे हैं। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो यहां के बड़े से बड़े सरकारी अस्पताल हों या फिर गांव देहात के स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात डॉक्टर। कोई भी इससे अछूता नहीं है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी करनी ही बंद कर दी है। कई वर्षों में किसी तरह का कोई अभियान नहीं चलाया गया, जबकि सीएम योगी आदित्यनाथ ने खुद सरकारी डॉक्टरों द्वारा प्राइवेट प्रैक्टिस किए जाने पर सख्त रुख अपनाया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि सरकारी सेवाओं में रहते हुए निजी प्रैक्टिस या नर्सिंग होम में सेवाएं देने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन जिम्मेदारों ने सीएम के आदेशों को भी दर किनार कर दिया। जिले में जिला अस्पताल, श्रीराम चिकित्सालय, जिला महिला अस्पताल और 14 सीएचसी के अलावा राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज है। जहां बड़ी संख्या में चिकित्सकों की तैनाती हैं। इनमें अमूमन सभी चिकित्सक एनपीए ले रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में तो शत प्रतिशत चिकित्सकों के एनपीए लेने की बात सामने आई है। गाहे-बगाहे शिकायतें भी सामने आती रहती हैं। हालांकि जिम्मेदारों ने चुप्पी साध रखी है। एक बार व्यापक स्तर पर अभियान चलाकर चेकिंग करने की जरूरत है। सूत्रों की मानें तो जिले के सरकारी अस्पतालों के निकट चल रही मेडिकल दुकानों के संचालक चिकित्सकों के प्राइवेट प्रैक्टिस के सूत्रधार माने जाते हैं। सारी सेटिंग यही कराते हैं। कई अस्पतालों के चिकित्सक इन्हीं के यहां जाकर प्रैक्टिस करते हैं। ओपीडी टाइम में मेडिकल स्टोर से पर्चा उनके मोबाइल पर पहुंच जाता है। इसके बाद चिकित्सक मरीज को देखकर दोबारा अस्पताल की ओपीडी में पहुंच जाता है। कुछ सरकारी डॉक्टर तो बड़े-बड़े नर्सिंग होम में जाकर भी अपनी सेवाएं देते हैं। हाल ही में महिला की मौत के बाद इस बात की भी पुष्टि हो चुकी है।
प्राइवेट प्रैक्टिस करने के आरोपों में हाल ही में अब तक चार चिकित्सकों के नाम सामने आए हैं। इनमें तीन सीएचसी के डॉक्टर हैं, जबकि एक मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक शामिल हैं। इनका वीडियो भी वायरल हुआ था। स्वास्थ्य विभाग मवई और रुदौली सीएचसी में चिकित्सकों की शिकायत मिलने के बाद मौके से हटाकर संबद्ध की कार्रवाई कर चुका है, जबकि एक सीएचसी पर तो वहां की अधीक्षिका ने ही अपने यहां तैनात चिकित्सक पर प्राइवेट प्रैक्टिस करने का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। हालांकि मामले में अभी तक किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं मेडिकल कॉलेज के एक वरिष्ठ चिकित्सक का नाम प्राइवेट प्रैक्टिस में आया तो उनका कद और भी बढ़ा दिया गया।
नॉन-प्रैक्टिस अलाउंस (एनपीए) केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सरकारी डॉक्टरों और चिकित्सा अधिकारियों को दिया जाने वाला एक विशेष मासिक भत्ता है, जो निजी प्रैक्टिस न करने के बदले में मिलता है। यह मुख्य रूप से उन डॉक्टरों को दिया जाता है जिनकी डिग्री क्लिनिकल है और जो पूर्णकालिक सरकारी सेवा में हैं। उन्हें बेसिक और डीए का 10 फीसदी अतिरिक्त एनपीए के रूप में दिया जाता है।
प्रभारी सीएमओ डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि एनपीए लेने वाले चिकित्सकों को पूरी तरह से प्राइवेट प्रैक्टिस न करने की मनाही है। शिकायतें आती हैं तो कार्रवाई की जाती है। इनके खिलाफ किसी तरह के अभियान चलाने की जानकारी सीएमओ ही दे सकते हैं। मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. डीएस मर्तोलिया का कहना है कि हमारे यहां सभी चिकित्सकों से अंडरटेकिंग करा लिया गया है। एनपीए लेने वाले सभी चिकित्सकों ने लिखकर दिया है कि वह प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करेंगे।
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