० एल-1 से एल-4 तक तय हुई जवाबदेही : सीएम हेल्पलाइन सिस्टम से शिकायतों पर होगी रियल टाइम मॉनिटरिंग
० सीएम हेल्पलाइन जनता और प्रशासन के बीच भरोसे की मजबूत कड़ी बनेगी ….. कलेक्टर
सुरेश मिनोचा
एमसीबी, 15 मई (आरएनएस)। जिले में सुशासन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली का जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ स्थित अमृत सदन सभाकक्ष में आयोजित इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम की अध्यक्षता कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी संतन देवी जांगड़े ने की। प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की तकनीकी, प्रशासनिक एवं व्यावहारिक प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ अंकिता सोम, एसडीएम लिंगराज सिदार, योजना सलाहकार एवं मास्टर ट्रेनर विषय विशेषज्ञ अशोक चौबे तथा मास्टर ट्रेनर पवन तिवारी ने अधिकारियों को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली, शिकायत निवारण प्रक्रिया, समय-सीमा, एस्केलेशन सिस्टम, फीडबैक व्यवस्था और डैशबोर्ड मॉनिटरिंग के संबंध में विस्तारपूर्वक प्रशिक्षण प्रदान किया।
हर शिकायत का समाधान तय समय में, 1076 पोर्टल से होगी सतत निगरानी
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 छत्तीसगढ़ शासन की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य नागरिकों की शिकायतों का त्वरित, पारदर्शी एवं जवाबदेह समाधान सुनिश्चित करना है। इस प्रणाली के माध्यम से नागरिक अपनी समस्याएं घर बैठे दर्ज करा सकेंगे तथा शिकायत की प्रगति की जानकारी भी ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे। प्रत्येक शिकायत को एक यूनिक टोकन नंबर प्रदान किया जाएगा, जिससे शिकायतकर्ता किसी भी समय उसकी स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकेगा।
प्रशिक्षण में अधिकारियों को बताया गया कि सीएम हेल्पलाइन केवल शिकायत दर्ज करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण शिकायत प्रबंधन प्रणाली है, जिसमें शिकायत पंजीयन से लेकर अंतिम समाधान और नागरिक फीडबैक तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित होगी। शिकायत के समाधान के पश्चात नागरिक से फीडबैक लिया जाएगा। यदि शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट नहीं होता है, तो शिकायत स्वत: अगले स्तर के अधिकारी के पास अग्रेषित हो जाएगी। इससे शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निराकरण को बढ़ावा मिलेगा।
अधिकारियों को समझाया गया कि प्रणाली में शिकायतों को विभागवार एवं श्रेणीवार वर्गीकृत किया गया है ताकि शिकायत सही अधिकारी तक शीघ्र पहुंचे और उसका निराकरण समय-सीमा के भीतर किया जा सके। उदाहरण के रूप में आय प्रमाण पत्र जारी न होने, बिजली चोरी, अस्पताल में दवाओं की अनुपलब्धता, आयुष्मान कार्ड नहीं बनने, सड़क दुर्घटना सहायता, वृक्ष कटाई अनुमति तथा पुलिस व्यवहार से जुड़ी शिकायतों की श्रेणियों का उल्लेख किया गया।
रु1 से रु4 तक जवाबदेही तय, समय सीमा पार होते ही स्वत: होगा एस्केलेशन
प्रशिक्षण में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता स्वत: एस्केलेशन प्रणाली को विस्तार से समझाया गया। बताया गया कि शिकायतों के निराकरण के लिए चार स्तर निर्धारित किए गए हैं। रु1 स्तर ब्लॉक एवं क्षेत्रीय स्तर का होगा, रु2 जिला स्तर, रु3 संभाग एवं निदेशालय स्तर तथा रु4 सचिव एवं विभागाध्यक्ष स्तर का होगा।
प्रत्येक स्तर के लिए शिकायत निराकरण की समय-सीमा निर्धारित की गई है। ब्लॉक स्तर पर 7 से 10 दिन, जिला स्तर पर 10 से 14 दिन, संभाग स्तर पर 7 से 14 दिन तथा राज्य स्तर पर 14 से 21 दिन की समय-सीमा तय की गई है। यदि निर्धारित अवधि में शिकायत का समाधान नहीं किया जाता है तो शिकायत स्वत: अगले स्तर पर पहुंच जाएगी। इससे अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी तथा शिकायतों को लंबित रखने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।
मास्टर ट्रेनर अशोक चौबे ने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि शिकायत श्रेणी केवल एक विषय नहीं बल्कि एक प्रशासनिक अग्रसरण इकाई है, जिसके माध्यम से शिकायतें सही विभाग एवं सक्षम अधिकारी तक पहुंचती हैं। उन्होंने कहा कि शिकायत की सही श्रेणी का चयन पूरे सिस्टम की सफलता का आधार है। यदि शिकायत सही श्रेणी में दर्ज होगी तो उसका त्वरित एवं प्रभावी समाधान संभव हो सकेगा।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी बताया कि शिकायतों की निगरानी के लिए एक उन्नत डैशबोर्ड तैयार किया गया है, जिसमें लंबित शिकायतें, समय-सीमा से बाहर होने वाली शिकायतें, निराकृत शिकायतें, स्पेशल क्लोजर प्रकरण एवं विभागवार प्रदर्शन की जानकारी रियल टाइम में उपलब्ध रहेगी। इससे प्रशासनिक अधिकारियों को लगातार मॉनिटरिंग करने में सुविधा होगी।
ऑनलाइन पोर्टल, मोबाइल ऐप और व्हाट्सऐप से दर्ज होंगी शिकायतें
प्रशिक्षण में अधिकारियों को सीएम हेल्पलाइन पोर्टल की तकनीकी कार्यप्रणाली का लाइव प्रदर्शन भी किया गया। बताया गया कि नागरिक 1076 हेल्पलाइन नंबर, वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप, व्हाट्सऐप तथा भौतिक आवेदन के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकेंगे। शिकायत दर्ज करने के लिए नागरिक को मोबाइल नंबर, नाम, पता, विभाग, शिकायत श्रेणी एवं शिकायत विवरण दर्ज करना होगा। आवश्यक दस्तावेज भी पोर्टल पर अपलोड किए जा सकेंगे।
ओटीपी सत्यापन के बाद शिकायत सफलतापूर्वक दर्ज हो जाएगी तथा नागरिक को 12 अंकों का शिकायत टोकन नंबर प्राप्त होगा। इसी टोकन नंबर के माध्यम से शिकायत की वर्तमान स्थिति, अधिकारी की कार्यवाही एवं समाधान की जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।
मास्टर ट्रेनर पवन तिवारी ने अधिकारियों को अधिकारी लॉगिन, प्रोफाइल अपडेट, शिकायतों का अवलोकन, शिकायत संपादन, प्रतिवेदन अपलोड, पार्शियली क्लोज, स्पेशल क्लोजर तथा शिकायत समाधान की तकनीकी प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि यदि कोई शिकायत संबंधित विभाग की श्रेणी में नहीं आती है तो अधिकारी सम्बंधित नहीं है विकल्प चुनकर उसे वापस सीएम हेल्पलाइन बकेट में भेज सकते हैं।
प्रशिक्षण में अधिकारियों को शिकायत समाधान के दौरान नागरिकों से संवाद बनाए रखने, आवश्यकतानुसार साइट विजिट करने तथा गुणवत्तापूर्ण प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए। बताया गया कि शिकायतों का केवल औपचारिक निपटारा नहीं बल्कि वास्तविक समाधान सुनिश्चित करना ही इस प्रणाली का मूल उद्देश्य है।
सुशासन, पारदर्शिता और जनविश्वास को मजबूत करेगी मुख्यमंत्री हेल्पलाइन
वहीं कलेक्टर संतन देवी जांगड़े ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शासन और जनता के बीच विश्वास की मजबूत कड़ी बनेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित समय-सीमा में उसका गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली प्रशासन की कार्यशैली को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाएगी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का उद्देश्य केवल शिकायत दर्ज करना नहीं बल्कि नागरिकों को समाधान का भरोसा देना है। इसलिए सभी अधिकारी संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिकायतों को लंबित न रखें तथा समय-सीमा का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि यह विभागीय कार्यकुशलता का प्रमुख मापदंड होगा। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों को बताया गया कि सीएम हेल्पलाइन प्रणाली में मॉनिटरिंग एवं इवैल्यूएशन की विशेष व्यवस्था की गई है। विभागवार, जिलावार एवं अधिकारीवार प्रदर्शन की समीक्षा नियमित रूप से की जाएगी। लंबित शिकायतों, अधिक विलंब वाले मामलों एवं विभागीय प्रदर्शन का विश्लेषण डैशबोर्ड के माध्यम से किया जाएगा। इससे प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार लाने एवं जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी।
प्रशिक्षण में यह भी स्पष्ट किया गया कि सूचना का अधिकार, न्यायालय में विचाराधीन मामले, विभागीय स्थापना संबंधी मांगें तथा केंद्र सरकार से संबंधित प्रकरण सीएम हेल्पलाइन के अंतर्गत मान्य नहीं होंगे। जिले के समस्त विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन प्रणाली की उपयोगिता को समझा। प्रशिक्षण के अंत में अधिकारियों ने कहा कि यह व्यवस्था निश्चित रूप से आम नागरिकों को राहत पहुंचाने, शिकायतों के त्वरित समाधान तथा सुशासन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से शासन और जनता के बीच संवाद की नई संस्कृति विकसित होगी, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता और नागरिक संतुष्टि दोनों को मजबूती मिलेगी।
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