अजय दीक्षित
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की नीट परीक्षा ( नेशनल एंट्रेंस एलिजिबिलिटी टेस्ट) का पेपर लीक होने के कारण परीक्षा रद्द करदी गई है।यह नीट परीक्षा देश भर के 22 लाख परीक्षार्थियों ने 3 मई को देश भर के 1500 से अधिक केंद्रों पर दी थी।इस मामले से यह साबित हो गया है कि देश में प्रतिभा पर गिद्धों का डेरा है।अबकी बार इन गिद्धों रूपी मांगीलाल और दिनेश रीयल सेक्टर के जयपुर के कारोबार से जुड़े ने नासिक एक बेहद प्रतिष्ठित प्रेस से पूरा पेपर 30 लाख में खरीदा और उसे सबसे पहले अपने पुत्र को सीकर में उपलब्ध करवाया। उसके बाद जयपुर से महाराष्ट्र, गोवा, ओडिशा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, असम, पश्चिमी बंगाल, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना,में विभिन्न ठिकानों पर लाखों रुपए में बेच कर लगभग 10 करोड़ रुपए वसूल किए।
ये पेपर 26,27 अप्रैल को खरीदा गया। चुकी सॉफ्ट कॉपी में था इसलिए एक दिन में ही पूरे भारत में सर्कुलेट हो गया था।
सबसे पहले जयपुर में पुलिस को एक गैस पेपर मिला जो 420 प्रश्न का था उसमें केमिस्ट्री के 120 प्रश्न हू ब हु ओरिजनल पेपर में थे ।एक कोचिंग यह जारी किया था तब पुलिस का माथा ठनका तो मालूम हुआ कि पूरा पेपर ही कई विद्यार्थी पर था ।इस पर केंद्रीय मंत्री शिक्षा धर्मेंद्र प्रधान ने संज्ञान लिया और जांच कराई तो पाया कि पूरे देश में व्हाट्सएप के जरिए फेल गया ।कई लोगों ने पच्चीस हजार में खरीदा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने सीबीआई की रिपोर्ट पर परीक्षा रद्द कर दी। सीबीआई अभी जांच कर रही है बताया जाता है कि पूरे देश में 100 से अधिक लोग गिरफ्तार कर लिए गए हैं।
यह दूसरा मौका जब एनटीए की नीट परीक्षा पर प्रश्न लग
रहे हैं इससे पूर्व 2024 की परीक्षा पर भी सवाल उठे थे।
दरअसल देश में एक तबका ऐसा है कि उसे अपने बच्चों डॉक्टर बनाना है क्योंकि मेडिकल डॉक्टर की आय का कोई ठिकाना नहीं है।देश में कुल निजी और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एक लाख सीट है और 22 लाख परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी।यानि कड़ी प्रतियोगिता है।इस लिए लोग गलत रास्ते अपनाते हैं । दिनेश और मांगीलाल के घर चार बच्चों को ,2024, में प्रवेश मिला है।
मेडिकल प्रवेश परीक्षा पर हमेशा से ही गिद्धों की नजर रही है।इन गिद्धों में दलाल, राजनेता,नौकरशाह शामिल रहे हैं।इनका जाल राज्यों की यूपीएससी, सीएससी,कुछ हद तक यूपीएससी,सेना भर्ती तक फैला हुआ है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा भी इसमें शामिल है। बताया जाता है कि ये लोग सबसे पहले पेपर सेटर से बात करते हैं फिर पता लगाते हैं कि पेपर किस प्रेस में प्रकाशित हो रहा है।बस यही एक कमजोर कड़ी से सॉफ्ट कॉपी प्राप्त करते हैं। और मनमाने तरीके से बेच देते हैं।इसमें प्रतिभा शील छात्र पीछे रह जाते हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय इन पेपर को कलेक्टर के हवाले कर देते हैं और कलेक्टर इन्हें कोतवाली में रख देता है मगर
रात को ही लिफाफे को खोल कर पेपर को फोटो कॉपी कर या पीडीएफ बनाकर सर्कुलेट करदेते है। नेटवर्क इतना तगड़ा है कि प्रत्येक राज्य, महानगर,बड़े शहरों से जिले मुख्यालय तक पहुंचा ही नहीं देते बल्कि रात में ही ऑनलाइन पैसा भी ट्रांसफर कर दिया जाता है।
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