कबीरधाम 18 मई (आरएनएस)“रात का पारिवारिक विवाद देखते ही देखते खून से सनी हत्या में बदल गया… मकान की छत पर शुरू हुआ झगड़ा इतना हिंसक हुआ कि समधी ने लकड़ी के डंडे से सिर और कान पर ताबड़तोड़ वार कर रिश्ते को मौत में बदल दिया, लेकिन कबीरधाम पुलिस ने फरार आरोपी को दबोचकर हत्या की गुत्थी सुलझा दी।” कबीरधाम जिले के थाना कुकदुर क्षेत्र के ग्राम लखनपुर में हुए सनसनीखेज हत्याकांड ने पूरे इलाके को दहला दिया। घटना 16 मई 2026 की रात करीब 8 से 9 बजे के बीच की बताई जा रही है, जब ग्राम लखनपुर निवासी टहलू राम टेकाम और उसके समधी दुखीराम श्याम निवासी दैहानटोला के बीच मकान की छत पर किसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ। देखते ही देखते कहासुनी हिंसक झगड़े में बदल गई और गुस्से में बेकाबू हुए दुखीराम श्याम पिता पठारी श्याम उम्र 74 वर्ष ने लकड़ी के गेड़ा से टहलू राम टेकाम के सिर और कान पर जोरदार हमला कर दिया। वार इतने गंभीर थे कि टहलू राम टेकाम लहूलुहान होकर मौके पर ही ढेर हो गया। घटना के बाद आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया। अगले दिन 17 मई 2026 को मनीराम श्याम ने थाना कुकदुर पहुंचकर पूरे मामले की सूचना दी। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी निरीक्षक संग्राम सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची। मकान की छत पर टहलू राम टेकाम का शव पड़ा मिला, सिर और कान से खून बह रहा था। पुलिस ने मौके पर देहाती मर्ग कायम कर पंचनामा कार्रवाई शुरू की, गवाहों के बयान लिए गए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। हत्या की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेन्द्र बघेल के मार्गदर्शन और एसडीओपी पंडरिया भूपत सिंह धनेश्री के पर्यवेक्षण में आरोपी की तलाश तेज की गई। पुलिस ने तकनीकी और स्थानीय सूचना तंत्र सक्रिय किया और जल्द ही आरोपी दुखीराम श्याम को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में आरोपी टूट गया और उसने हत्या करना स्वीकार कर लिया। आरोपी की निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल लकड़ी का डंडा बरामद कर विधिवत जप्त किया गया। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। इस पूरी कार्रवाई में सहायक उपनिरीक्षक शिवमोहन उपाध्याय, प्रधान आरक्षक मनोज तिवारी, आरक्षक संदीप पाण्डेय और आरक्षक कृष्णा कुमार धुर्वे की भूमिका अहम रही। फिलहाल, कुकदुर का यह हत्याकांड एक बार फिर बता गया कि रिश्तों में पनपा गुस्सा जब हिंसा में बदलता है तो उसका अंत सिर्फ सलाखों के पीछे होता है।
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