नई दिल्ली,20 मई (आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सरकारी पैनल और लॉ अधिकारी पदों पर महिला वकीलों के लिए 30 प्रतिशत कोटा की मांग वाली याचिका पर जवाब मांगा.
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने की. सीनियर वकील और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने वकील वरुण सिंह के साथ सीजेआई की बेंच के सामने अपनी बात रखी.
वकील की बात सुनने के बाद बेंच ने लाडली फाउंडेशन ट्रस्ट की तरफ से दायर की गई जनहित याचिका पर केंद्र और दूसरों को नोटिस जारी किया.
जनहित याचिका में केंद्र, राज्य सरकारों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को सुप्रीम कोर्ट के पैनल से लेकर स्थानीय कानूनी सहायता प्राधिकरण तक, सभी कानूनी स्तर पर महिलाओं के लिए कम से कम 30 प्रतिशत कोटा लागू करने का निर्देश देने की मांग की गई है.
याचिका में कहा गया कि रिकॉर्ड संख्या में महिलाओं के लॉ स्कूलों में शामिल होने के बावजूद, संरचनात्मक बाधाएं उनकी प्रोफेशनल तरक्की में रुकावट डाल रही हैं.
याचिकाकर्ता ने कहा कि उसने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर सभी सरकारी पैनल में महिला वकीलों के लिए कम से कम 30 प्रतिशत आरक्षण/प्रतिनिधित्व के लिए निर्देश देने की मांग की है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट पैनल, हाई कोर्ट पैनल, सरकारी विधि अधिकारी पद, कानूनी सहायता पैनल और सभी केंद्रीय और राज्य सरकार /सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का पैनलीकरण शामिल हैं, लेकिन यह इन्हीं तक सीमित नहीं है.
याचिका में कहा गया, ताकि संविधान के अनुच्छेद 14, 15 (3), 19 (1) (जी) और 21 के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकारों के प्रभावी प्रवर्तन को सुरक्षित किया जा सके.
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