नई दिल्ली,21 मई (आरएनएस)। सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हुई कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट बंद कर दिया गया है। अकाउंट खोलने पर अब लीगल डिमांड के चलते यह अकाउंट रोका गया है संदेश दिखाई दे रहा है। इस कार्रवाई के बाद पार्टी के समर्थकों और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच चर्चा तेज हो गई है।
पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया है कि अकाउंट को बंद किए जाने से पहले उसे हैक करने की कोशिश की गई थी। उनके अनुसार जब हैकिंग के प्रयास सफल नहीं हुए तो अकाउंट को कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया। एक्स प्लेटफॉर्म पर पार्टी के करीब 1.6 लाख फॉलोअर्स थे, जबकि इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स की संख्या करोड़ों तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है।
एक बयान के विरोध से शुरू हुआ ऑनलाइन अभियान
कॉकरोच जनता पार्टी नामक यह डिजिटल अभियान 16 मई को शुरू हुआ था। इसकी पृष्ठभूमि में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) द्वारा एक कार्यक्रम के दौरान कुछ युवाओं के संदर्भ में कॉकरोच शब्द के उपयोग को लेकर सोशल मीडिया पर हुई प्रतिक्रिया बताई जा रही है। इसी मुद्दे पर अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सवाल उठाते हुए अभियान की शुरुआत की थी, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़ते गए।
रिपोर्टों के अनुसार, ऑनलाइन मंचों के माध्यम से लाखों लोगों ने इस अभियान के समर्थन में पंजीकरण कराया है। सोशल मीडिया पर कई चर्चित व्यक्तियों और सार्वजनिक हस्तियों के नाम भी इसके समर्थकों की सूची में बताए जा रहे हैं।
कौन हैं अभिजीत दीपके?
30 वर्षीय अभिजीत दीपके मूल रूप से महाराष्ट्र के पुणे से हैं। उन्होंने पत्रकारिता में स्नातक शिक्षा प्राप्त करने के बाद अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में उच्च शिक्षा हासिल की है। वर्तमान में वे राजनीतिक संचार और डिजिटल रणनीति के क्षेत्र में कार्यरत हैं।
वेबसाइट और घोषणापत्र भी जारी
कॉकरोच जनता पार्टी ने अपनी वेबसाइट और घोषणापत्र भी जारी किया है। घोषणापत्र में न्यायपालिका और राजनीति से जुड़े कई सुधारात्मक प्रस्ताव रखे गए हैं। इनमें सेवानिवृत्ति के बाद मुख्य न्यायाधीशों को राज्यसभा में नामित नहीं किए जाने, महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने, तथा दल-बदल करने वाले सांसदों और विधायकों पर लंबे समय तक चुनाव लडऩे से रोक लगाने जैसी मांगें शामिल हैं।
अकाउंट बंद होने पर बढ़ी बहस
एक्स अकाउंट बंद होने के बाद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की नीतियों और ऑनलाइन अभियानों की वैधता को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि अकाउंट पर कार्रवाई के पीछे की आधिकारिक वजह को लेकर अभी तक विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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