धमतरी 22 मई (आरएनएस) मोबाइल गुम होने के बाद उम्मीद छोड़ चुके लोगों के चेहरों पर उस वक्त मुस्कान लौट आई, जब धमतरी पुलिस ने साइबर ट्रैकिंग और तकनीकी जांच के दम पर 151 गुम मोबाइल उनके असली मालिकों को वापस सौंप दिए। पुलिस लाईन रूद्री स्थित पुलिस कंपोजिट बिल्डिंग में आयोजित विशेष कार्यक्रम में ऐसा भावुक नजारा देखने मिला, जहां महीनों और वर्षों पहले खो चुके मोबाइल अचानक हाथ में आते ही लोग खुशी से भर उठे। इस पूरे अभियान की कमान पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार ने संभाली, जिनके निर्देशन में चल रहा “गुम मोबाइल वापसी अभियान” अब आम लोगों के लिए बड़ी राहत बन चुका है। कार्यक्रम में महापौर जगदीश रामू रोहरा और कलेक्टर अविनाश मिश्रा विशेष रूप से मौजूद रहे। पुलिस की साइबर टीम ने जिन मोबाइलों को ट्रेस किया, उनमें कई फोन ओड़िशा और मध्यप्रदेश में उपयोग हो रहे थे। तकनीकी विश्लेषण, लोकेशन ट्रैकिंग और लगातार निगरानी के बाद पुलिस ने उन्हें रिकवर कर असली मालिकों तक पहुंचाया।

धमतरी पुलिस इससे पहले भी 670 से ज्यादा गुम मोबाइल लौटाकर लोगों का भरोसा जीत चुकी है। ग्राम रावां निवासी सीताराम गजेन्द्र ने भावुक होकर बताया कि कुर्रा बाजार में प्याज खरीदते समय उनका मोबाइल जेब से गायब हो गया था और उन्होंने उसे वापस मिलने की उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन धमतरी पुलिस ने उनका भरोसा लौटा दिया। वहीं रायपुर से आए कल्पेश ने भी कहा कि मोबाइल वापस मिलना उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। कार्यक्रम के दौरान एसपी सूरज सिंह परिहार ने दो दिन पहले गश्त ड्यूटी के दौरान सड़क हादसे में दिवंगत हुए प्रधान आरक्षक स्वर्गीय विजय बैरागी को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि मोबाइल आज हर व्यक्ति की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, इसलिए पुलिस पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ लोगों को राहत पहुंचाने में जुटी है। महापौर जगदीश रामू रोहरा ने कहा कि धमतरी पुलिस लगातार ऐसे काम कर रही है जिससे जनता और पुलिस के बीच विश्वास मजबूत हुआ है, वहीं कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने साइबर ट्रैकिंग और टीमवर्क के जरिए मोबाइल बरामद करने की इस पहल को जनहित में बेहद सराहनीय बताया। कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र कुमार पाण्डेय, सीएसपी अभिषेक चतुर्वेदी, डीएसपी साइबर भानूप्रताप चंद्राकर समेत बड़ी संख्या में नागरिक और मोबाइल हितग्राही मौजूद रहे। बहरहाल, धमतरी पुलिस का यह अभियान सिर्फ मोबाइल लौटाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह उन लोगों के भरोसे को वापस लाने की कहानी बन गया है, जो कभी सोच चुके थे कि उनका खोया सामान अब कभी नहीं मिलेगा।


