दुर्ग 30 जून 2026 (आरएनएस) सिर्फ कुछ हजार रुपये के कमीशन के लिए अपने बैंक खाते साइबर ठगों को सौंपने वाले 23 लोगों पर दुर्ग पुलिस ने शिकंजा कस दिया है। थाना छावनी पुलिस ने साइबर ठगी के एक संगठित नेटवर्क का खुलासा करते हुए ऐसे लोगों को हिरासत में लिया, जो साइबर अपराधियों के लिए ‘म्यूल अकाउंट’ उपलब्ध कराकर ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों के जरिए इधर-उधर पहुंचाने में मदद कर रहे थे। तकनीकी साक्ष्यों, बैंक खातों के विश्लेषण और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर हुई इस कार्रवाई ने साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क की परतें खोल दी हैं।
थाना छावनी में अपराध क्रमांक 312/2026 के तहत धारा 318(2), 318(3) एवं 318(4) भारतीय न्याय संहिता (BNS) में दर्ज प्रकरण की विवेचना के दौरान पुलिस को पता चला कि कई लोग कमीशन के लालच में अपने और अन्य व्यक्तियों के बैंक खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध करा रहे थे। इन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम का अवैध लेनदेन किया जाता था। तकनीकी जांच, बैंक ट्रांजैक्शन और अन्य साक्ष्यों के आधार पर 29 जून को पुलिस ने एक साथ कार्रवाई करते हुए पूरे नेटवर्क तक पहुंच बनाई।
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान राकेश गुप्ता (22) निवासी सोनिया गांधी नगर खुर्सीपार, के. हरीश (30) निवासी कैम्प-2 शर्मा कॉलोनी छावनी, योगेश राजभर (37) निवासी सेक्टर-11 खुर्सीपार, कार्तिक (21) निवासी महात्मा गांधी नगर, मोनू चतुर्वेदी (31) निवासी खुर्सीपार, अखिलेश सोनकर (22) निवासी सेक्टर-11 खुर्सीपार, पवन कुमार साव (23) निवासी हथखोज, पीयूष बिजलानी (37) निवासी वैशाली नगर, अभय मिश्रा (24) निवासी भिलाई, सुनील प्रसाद (34) निवासी राजीव नगर छावनी, कन्हैया लाल (48) निवासी सेक्टर-11, लखविन्दर सिंह (59) निवासी शर्मा कॉलोनी, सचिन पाल (28) निवासी शर्मा कॉलोनी, रोहित ठाकुर (24) निवासी विवेकानंद नगर कैम्प-2 तथा नरेन्द्र (35) निवासी रामनगर कोहका, भिलाई को हिरासत में लिया।
वहीं निक्की राव (25) निवासी आजाद नगर पावर हाउस, सुधा सिंह (50) निवासी जवाहर नगर सुपेला, शिव कुमार सिंह (75) निवासी एकता चौक, मोहम्मद शबीर (19) निवासी गौतम नगर खुर्सीपार, ए. सागर हरी (36) निवासी स्मृति नगर, जय प्रकाश नारायण (45) निवासी राजीव नगर छावनी, मोहन कुमार मेहतो (46) निवासी एकता नगर छावनी तथा पवन कुमार गुप्ता (58) निवासी खुर्सीपार को धारा 35(1) BNSS के तहत नोटिस देकर छोड़ा गया है।

आरोपियों के कब्जे से 11 मोबाइल फोन, 3 एटीएम कार्ड, 3 बैंक पासबुक, 3 आधार कार्ड, 3 चेकबुक सहित बैंकिंग और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज जब्त किए गए हैं। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर साइबर ठगी से जुड़े अन्य लोगों और नेटवर्क की कड़ियां तलाश रही है। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह साइबर अपराधियों के लिए बैंकिंग चैनल उपलब्ध कराकर अवैध धनराशि को सुरक्षित तरीके से ट्रांसफर कराने का काम करता था।
गौरतलब है कि साइबर ठग अब सीधे लोगों को ठगने के साथ-साथ उनके बैंक खातों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम, पासबुक, चेकबुक या सिम किसी दूसरे को देना आपको भी सीधे कानून के शिकंजे में ला सकता है। कुछ हजार रुपये का लालच जिंदगीभर की मुसीबत बन सकता है।

