*CBSE का थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, सुनवाई अगले हफ्ते होगी
New delhi 22 may (rns)/ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ( CBSE ) के 2026-27 शैक्षणिक सत्र से कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए तीसरी भाषा अनिवार्य करने के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) के जरिए चुनौती दी गई है। याचिका में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की ओर से नई भाषा नीति को अव्यावहारिक बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की गई है। सीबीएसई की नई तीन-भाषा नीति को लेकर वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है. याचिका में उन्होंने कहा कि कक्षा 9 के छात्रों पर अचानक अतिरिक्त भाषाएं पढ़ने का दबाव डालना ठीक नहीं है.
CBSE को लेकर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. जहां एक ओर 12वीं बोर्ड परीक्षा के बाद से स्कैंड कॉपियों को लेकर मामला थम नहीं रहा है तो वहीं थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर बहस जारी है.
CBSE से जुड़े विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. ऑन स्क्रीन मार्किंग के बाद थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. अब ये मामला कानून की चौखट तक पहुंच गया है. मामले में वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत के सामने मामले की अर्जेट सुनवाई के लिए मौखिक अनुरोध किया। रोहतगी ने दलील दी कि CBSE की नई नीति के तहत कक्षा 9 में छात्रों पर अतिरिक्त भाषाएं अनिवार्य की जा रही हैं, जिससे पढ़ाई का दबाव बढ़ेगा और परीक्षा व्यवस्था में अव्यवस्था पैदा होगी।

