पुलवामा,22 मई (आरएनएस)। पहलगाम आतंकी हमले को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अपनी चार्जशीट में नए खुलासे किए हैं। एनआईए ने बताया कि पहलगाम हमले में हुए शामिल तीनों आतंकवादियों ने बर्बर घटना को अंजाम देने से पहले एक पेड़ के नीचे दोपहर का खाना खाया था। इन तीनों आतंकवादियों की पहचान फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी के रूप में हुई है। ये तीनों 29 जुलाई को ऑपरेशन महादेव में मारे गए थे।
हमले से एक दिन पहले तीनों आतंकवादी बैसरन के पास एक स्थानीय व्यक्ति के घर में रुके थे। स्थानीय निवासी परवेज अहमद ने कहा, 21 अप्रैल की शाम 5 बजे मैं, मेरी पत्नी और बेटे झोपड़ी में बैठे थे। मेरे मामा बशीर अहमद अंदर आए और हमें चुप रहने को कहा। वे बाहर से 3 बंदूकधारियों के साथ वापस आए। तीनों ने मुझसे पानी मांगा, क्योंकि वे थके और प्यासे थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने लंबी दूरी तय की है।
एनआईए ने विशेष कोर्ट में 1,597 पन्नों की चार्जशीट दायर कर पाकिस्तान से जुड़े षड्यंत्र की भी जानकारी दी है। एजेंसी ने इस हमले की योजना बनाने, अंजाम देने और उसमें सहयोग करने में भूमिका निभाने के लिए भारत द्वारा आतंकवादी घोषित किए गए हाफिज सईद के नेतृत्व वाले लश्कर-ए-तैयबा और हबीबुल्लाह मलिक उर्फ साजिद जट्ट के नेतृत्व वाले द रेसिस्टेंस फोर्स का भी नाम लिया है।
बैसरन घाटी में तीनों आतंकवादियों ने एक पेड़ के नीचे बैठकर दोपहर का भोजन किया। कुछ समय बाद उन्होंने अपने बैग से कंबल निकाले और उन्हें ओढ़ लिया। फिर 2 आतंकी वहां गए, जहां से एक नदी बैसरन में प्रवेश करती है और आसपास के माहौल का अंदाजा लेने लगे। फिर तीनों बाड़ के नीचे से घाटी में आए। 2 आतंकवादी शौचालयों के रास्ते मुख्य प्रवेश द्वार की ओर बढ़े, जबकि तीसरा जिपलाइन के दूसरे छोर की ओर गया।
दोपहर 2:23 बजे एक आतंकी ने अपनी एम-4 कार्बाइन से पहली गोली चलाई। इसके बाद 2 आतंकवादियों ने भी ढाबों और ढलान वाले इलाके के पास एके-47 राइफलों से गोलीबारी शुरू कर दी। भागते समय आतंकवादियों ने पेड़ों के पीछे छिपे 3 नागरिकों को करीब से गोली मारी। चार्जशीट के अनुसार, घाटी से बाहर निकलने के बाद आतंकवादियों ने जश्न मनाते हुए गोलियां चलाईं, जो पश्चाताप की कमी और आतंकी उद्देश्य के प्रति निरंतर निष्ठा का प्रमाण है।
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