अजय दीक्षित
पश्चिमी बंगाल का विधानसभा चुनाव के परिणाम एक युग का अंत और दूसरे युग का आरंभ है। चुनाव विशेषज्ञ देवस्कर भाऊ ने कहा है कि यह चुनाव भारतीय जनता पार्टी ने ही नहीं जीता है बल्कि बंगाल की जनता ने 2021 की भूल सुधार की है। इस बार 2026 में हिंदू ध्रुवीकरण हुआ और उसमें अभिजात्य वर्ग भी शामिल हो गया है।
इस सनातनी ध्रुवीकरण से पूरे देश की विपक्ष और मुस्लिम तुष्टिकरण करने वाली पार्टियों चूल्हें हिल गई है चाहे वह समाजवादी पार्टी हो या कांग्रेस, डीएमके हो। यद्यपि माना जाता है कि 2021 में भी तत्कालीन समय में भी परिवर्तन हो सकता था मगर तृणमूल कांग्रेस के कादर ने मतदान के दिन दो बजे के बाद छापा मतदान कर दिया और बंगाल पुलिस, मतदान से जुड़े अधिकारियों ने टीएमसी को सहयोग किया था।
टाइम्स ऑफ इंडिया के संपादक जयंत घोषाल कहते हैं कि अब हिंदू ध्रुवीकरण यहां से आगे ही बढ़ेगा और अन्य पार्टियां को अपनी राजनितिक जमीन नए सिरे से बनानी पड़ेगी। जयंत घोषाल ने कहा है कि केरल में दबे पांव सनातनी ध्रुवीकरण शुरू हो गया है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी ने 11.2 फीसदी वोट हासिल किए हैं।इतने मतों पर भारतीय जनता पार्टी को 20 सीट मिलना चाहिए था लेकिन किसी भी पार्टी ने भाजपा से हाथ नहीं मिलाया और 03 सीट ही मिली। लेकिन भाजपा को सीपीएम सीपीई आरएसपी लेफ्ट पार्टियों की हार से उपजे निरंक को अगले चुनाव के लिए भरना पड़ेगा और जनता के बीच जाना पड़ेगा । बिहार, महाराष्ट्र, असम, उड़ीसा, हरियाणा, दिल्ली में भी सनातनी ध्रुवीकरण हुआ है। भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2016 में 11 फीसदी वोट ले कर 03 सीट ही जीत सकी थी लेकिन 2021 में 40 फीसदी वोट मिले और सीट मिली 77 ,2026 में 46.5 मत हासिल कर 207 सीट जीती है।
दरअसल गुरु गोलवलकर ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को 1951 में इस लिए राजनीतिक दल बनाने के लिए कहा था क्योंकि तत्कालीन समय में हिंदुओं की बात करने को भी पाप बताया जाता था। श्यामा प्रसाद मुखर्जी हिंदू महासभाई थे।
और उन्होंने नेहरू मंत्री परिषद से इस्तीफा इस लिए दे दिया था क्योंकि कांग्रेस भी मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति पर चल पड़ी थी और जम्मू कश्मीर को भारतीय संविधान की अनुच्छेद 370 के तहत विशेष राज्य का दर्जा दे दिया था।
शेष देश के निवासियों को जम्मू कश्मीर जाने के लिए परमिट लेना पड़ता था । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चाहता था कि आर्टिकल 370 संविधान की मूल भावना के विपरीत लेकिन संघ के पास कुछ नहीं था । लेकिन गुरु गोलवलकर ने सनातनी ध्रुवीकरण के बीज बो दिए थे। भारतीय जनता पार्टी भी संघ का ही एक प्रकल्प है। जिसने शने शेन प्रगति की । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बनने के बाद संघ की विचारधारा पर तेजी से काम हुआ है।
बंगाल विधानसभा चुनाव में एक मुद्दा और सामने आया कि तृणमूल कांग्रेस राज में अराजकता बहुत थी जिसने जहां चाहा हावड़ा जंक्शन का गलियारा भी अतिक्रमण कर लिया था। बांग्लादेश से घुसपैठ हो लाखों लोग रोजगार करने बंगाल आ गया। मुस्लिम तुष्टिकरण को बढ़ावा दिया गया।
असम और बंगाल यह एक व्यथा है।दोनों ही राज्य कला संस्कृति, अध्यात्म, पर्यटन के लिए जाने जाते थे लेकिन 50 वर्षों में सब गुड गोबर कर दिया। ऐसे राज्य कोई भी उद्योग नहीं पनप सकता।यही स्थिति बिहार की थी ।आज तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, झारखंड,ओडिशा औद्योगिक क्षेत्र बने हुए हैं । रवींद्र नाथ टैगोर, रामकृष्ण परमहंस, शिशिर बसु, अरविंद घोष, विधानचंद्र राय, स्वामी विवेकानंद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, रासबिहारी दास,की भूमि को क्या से क्या बना दिया।
तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश उन्नत राज्य है ।देश जीडीपी का तीस फीसद हिस्सा इन्हीं राज्यों से आता है। ओडिशा, उत्तराखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़ ऐसे राज्य है जहां भूगर्भ संपदा है। जिसमें बॉक्साइड,आयरन अयस्क, कोल फील्ड भारी मात्रा में है। इन राज्यों भाजपा सरकार है। उद्योगों के लिए माकूल माहौल है।
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