गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही 23 मई (आरएनएस) हत्या, लूट, सड़क हादसे और साइबर क्राइम की गुत्थियां अब लैब पहुंचने का इंतजार नहीं करेंगी, जीपीएम पुलिस को मिली 65 लाख रुपये की अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन ने अपराध जांच की तस्वीर बदल दी है। जिला गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के तत्वावधान में इस हाईटेक मोबाइल फॉरेंसिक वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, जिसके बाद अब घटनास्थल पर ही वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने, प्रारंभिक जांच करने और अपराधियों तक तेजी से पहुंचने का रास्ता आसान हो गया है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अपराध अनुसंधान को आधुनिक तकनीक से मजबूत करने के उद्देश्य से जिले को यह अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध कराई गई है। करीब 65 लाख रुपये की लागत से तैयार इस मोबाइल फॉरेंसिक वैन में फिंगरप्रिंट जांच, रक्त नमूना परीक्षण, डिजिटल साक्ष्य संकलन, हाईटेक फोटोग्राफी, जैविक नमूना संरक्षण और प्रारंभिक विश्लेषण के आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं। सर्किट हाउस जीपीएम में आयोजित विशेष कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को घटनास्थल पर वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाने, उन्हें सुरक्षित रखने और न्यायालय में उनकी वैधानिकता बनाए रखने का प्रशिक्षण भी दिया गया। कार्यक्रम में कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन, जेएमएफसी पेंड्रारोड सुश्री सीमा जगदल्ला, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अविनाश, जनप्रतिनिधि, अधिवक्ता और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। विशेषज्ञों ने बताया कि घटनास्थल पर छोटी सी लापरवाही भी बड़े साक्ष्य खत्म कर सकती है, इसलिए वैज्ञानिक जांच बेहद जरूरी है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह वैन हत्या, चोरी, डकैती, सड़क दुर्घटना और साइबर अपराध जैसे गंभीर मामलों में बड़ी भूमिका निभाएगी। अब पुलिस मौके पर ही साक्ष्य सुरक्षित कर तेज और मजबूत विवेचना कर सकेगी। फिलहाल, जीपीएम पुलिस की यह नई वैज्ञानिक ताकत अपराधियों के लिए खतरे की घंटी और न्याय व्यवस्था के लिए बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई है।


