जांजगीर चांपा 23 मई (आरएनएस) करही गोलीकांड ने जांजगीर-चांपा पुलिस की नींद ही नहीं, पूरी कानून व्यवस्था की साख दांव पर लगा दी थी, गांव में दहशत थी, जनता में गुस्सा था, पुलिस पर सवाल उठ रहे थे, लेकिन सीमित सुरागों और भारी दबाव के बीच पुलिस ने हार नहीं मानी और आखिरकार “ऑपरेशन हंट” चलाकर उस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझा दी जिसने पूरे जिले को हिला दिया था। पिछले महीने ग्राम करही में हुए सनसनीखेज गोलीकांड के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी आरोपियों तक पहुंचना, क्योंकि शुरुआती जांच में ठोस सुराग बेहद कम थे। मीडिया की निगाह, राजनीतिक चर्चाएं और लगातार बढ़ता जनदबाव पुलिस के लिए परीक्षा बन चुका था। इसके बावजूद जांजगीर-चांपा पुलिस ने तकनीकी जांच, साइबर विश्लेषण और जमीनी खुफिया नेटवर्क को एक साथ एक्टिव किया। तपती गर्मी में लगातार दबिश दी गई। कई रातें बिना आराम के निगरानी में बीतीं। सुविधा विहीन गांवों में विशेष कैंप लगाए गए। 200 से अधिक CCTV फुटेज खंगाले गए। साइबर टीम और आसूचना इकाई ने 7 राज्यों तक जांच का दायरा फैलाया। कई बार जांच भटकी, कई बार हालात प्रतिकूल हुए, लेकिन टीम का धैर्य और रणनीति नहीं टूटी। आखिरकार “ऑपरेशन हंट” के तहत पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस पूरी कार्रवाई को जांजगीर-चांपा police की प्रोफेशनल दक्षता, टीमवर्क और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। पुलिस ने इस सफलता का श्रेय पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज, राजपत्रित अधिकारियों, थाना स्टाफ, साइबर टीम, आसूचना इकाई, मीडिया और सहयोगी नागरिकों को दिया है। बहरहाल, करही गोलीकांड की गुत्थी सुलझने के बाद एक बार फिर यह साबित हुआ कि अपराध कितना भी शातिर क्यों न हो, वैज्ञानिक जांच और लगातार पीछा आखिरकार अपराधियों को कानून के शिकंजे तक पहुंचा ही देता है।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

