रांची 25 मई (आरएनएस)। 2 वर्षीय बी.एड (कक्षा 6 से 8) सहायक आचार्य अभ्यर्थियों ने अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। “2 वर्षीय बीएड अभ्यर्थी न्याय मोर्चा” के बैनर तले जुटे अभ्यर्थियों ने कहा कि उनके साथ घोर अन्याय किया जा रहा है और सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी कर रही है।
अभ्यर्थियों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी पद के लिए निर्धारित न्यूनतम योग्यता से अधिक योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। इसके बावजूद झारखंड सरकार 2 वर्षीय बी.एड धारकों को कक्षा 6 से 8 के सहायक आचार्य पदों से बाहर कर रही है, जो न्यायसंगत नहीं है।
मोर्चा के सदस्यों ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के नियमों के अनुसार पूरे देश में कक्षा 6 से 8 तक के लिए 2 वर्षीय बी.एड पूरी तरह मान्य है। झारखंड सरकार ने भी वर्ष 2014 के बाद इसी नियम के तहत बी.एड कोर्स संचालित कराया। अभ्यर्थियों ने कहा कि उन्होंने जेटीईटी और सहायक आचार्य परीक्षा ईमानदारी से उत्तीर्ण की है तथा 350 से अधिक उम्मीदवार मेरिट सूची में चयनित हैं।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उनके पक्ष में सिंगल बेंच का फैसला आने के बावजूद सरकार नियुक्ति देने के बजाय एलपीए (डबल बेंच) में चली गई, जिससे योग्य युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। उन्होंने कहा कि कई अभ्यर्थियों की उम्र 50 वर्ष के पार हो चुकी है और लगातार कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने से उनका मानसिक और आर्थिक शोषण हो रहा है। अभ्यर्थियों ने यह भी सवाल उठाया कि जब झारखंड सरकार कक्षा 1 से 5 तक में 2 वर्षीय बी.एड धारकों को नियुक्ति दे रही है, तो कक्षा 6 से 8 में उन्हें अमान्य कैसे माना जा सकता है। उन्होंने सरकार से एलपीए वापस लेने, सिंगल बेंच के आदेश का पालन करने तथा ओडिशा हाईकोर्ट की डबल बेंच की तर्ज पर जल्द नियुक्ति देने की मांग की। धरना-प्रदर्शन के दौरान मोहम्मद समीउल्लाह, शशि कुमार, शशिकांत, हसीब, मुकेश, दुलारी, अनिल कुमार यादव, अरविंद कुमार, संजय ठाकुर समेत सैकड़ों अभ्यर्थी मौजूद रहे।
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