उज्जैन 25 मई (आरएनएस)। गंगा दशहरा के अवसर पर सोमवार को श्रद्धा और आस्था का माहौल रहा। पवित्र क्षिप्रा नदी के घाटों पर सुबह से ही स्नान और पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। साधु-संतों, महामंडलेश्वरों और देश-विदेश से आए अनुयायियों ने विधि-विधान से मां गंगा और क्षिप्रा नदी का पूजन कर पुण्य स्नान किया।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत डॉ. रवींद्र पुरी और महामंत्री हरिगिरि महाराज सहित कई संतों ने क्षिप्रा में डुबकी लगाई। उन्होंने सनातन संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डाला। घाटों पर दिनभर वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान चलते रहे। श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि और पापों के नाश की कामना की।
इस आयोजन में विदेशी श्रद्धालुओं की सहभागिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। पायलट बाबा की शिष्या किकोआइकवा और जापान से आए उनके अनुयायियों ने भारतीय संस्कृति से प्रभावित होकर क्षिप्रा में स्नान किया। उन्होंने घाटों पर साफ-सफाई कर सेवा कार्य भी किया, जिसकी संत समाज और स्थानीय लोगों ने सराहना की।
महामंत्री हरिगिरि महाराज ने गंगा दशहरा को पापों के नाश और पुण्य प्राप्ति का महापर्व बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा सिंहस्थ-2028 के लिए कराए जा रहे विकास कार्यों की प्रशंसा की। साथ ही, उन्होंने क्षिप्रा नदी को जल्द पूरी तरह स्वच्छ और निर्मल बनाने की मांग की, ताकि आगामी सिंहस्थ और पर्व स्नानों में श्रद्धालुओं को शुद्ध जल मिल सके।
गंगा दशहरा पर दत्त अखाड़ा घाट से एक भव्य चल समारोह भी निकाला गया। यह समारोह विभिन्न मार्गों से होते हुए दातार अखाड़ा पर संपन्न हुआ। अधिक मास होने के कारण इस बार पारंपरिक संत पेशवाई नहीं निकाली गई, हालांकि घाटों पर दिनभर स्नान, पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक आयोजन जारी रहे।

