जेल से निकलते ही बहाल हुए कार्यपालक अभियंता सनोथ सोरेन
रांची 27 मई (आरएनएस)। रांची झारखंड में भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई के सरकारी दावों की पोल खोलता एक मामला सामने आया है। रांची में ग्रामीण विकास विभाग के कार्यपालक अभियंता सनोथ सोरेन को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी ्रष्टक्च ने 5 जून 2025 को 60 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा था। इसके बावजूद न तो उन्हें निलंबित किया गया और न ही सेवा से हटाया गया। उल्टा जेल से बाहर आते ही उनका पदस्थापन कर दिया गया और कारावास की अवधि का पूरा वेतन भी भुगतान कर दिया गया।
48 घंटे में निलंबन का नियम, 3 महीने तक नहीं हुई कार्रवाई
सरकारी सेवा नियमावली के अनुसार किसी भी अधिकारी की गिरफ्तारी के 48 घंटे के भीतर उसे निलंबित करना अनिवार्य है। सनोथ सोरेन करीब 3 महीने तक जेल में रहे, लेकिन ग्रामीण विकास विभाग ने उन्हें निलंबित नहीं किया। यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि ्रष्टक्च ने गिरफ्तारी के समय उनके हरमू स्थित आवास से 17 लाख रुपये नकद भी बरामद किए थे।
बिल पास करने के एवज में मांगी थी रिश्वत
्रष्टक्च के अनुसार सनोथ सोरेन ने एक संवेदक के बिल का भुगतान करने के बदले 60 हजार रुपये की मांग की थी। शिकायत मिलने पर ्रष्टक्च ने जाल बिछाया और उन्हें रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। देवघर से रांची तक विवादों में रहे सूत्रों के मुताबिक सनोथ सोरेन इसके पहले देवघर में भी ग्रामीण विकास विभाग में पदस्थापित थे। वहां भी उन पर अनियमितता के आरोप लगे थे। सवालों के घेरे में विभाग
इस पूरे मामले ने ग्रामीण विकास विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रंगे हाथ पकड़े जाने और घर से लाखों की नकदी बरामद होने के बाद भी अधिकारी को संरक्षण देना कई सवाल उठाता है। विभाग के अधिकारी इस पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
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