रांची 29 मई (आरएनएस)। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटीईटी) 2026 में क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं को शामिल किए जाने की मांग को लेकर आज झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू को लिखित सुझाव सौंपा गया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वर्ष 2008, 2012 और 2016 में आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में अंगिका, भोजपुरी और मगही जैसी भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा के रूप में शामिल किया गया था, लेकिन वर्तमान अधिसूचना में इन्हें स्थान नहीं दिया गया है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि भाषा समाज और संस्कृति को जोडऩे का सबसे सशक्त माध्यम है। आज की युवा पीढ़ी को अपनी क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं में लिखने, पढऩे और बोलने का अवसर मिलना चाहिए। ऐसे में प्रतियोगी परीक्षाओं में क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं के विकल्प को बढ़ाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जेटीईटी 2026 से केवल अंगिका, भोजपुरी, मगही और मैथिली जैसी क्षेत्रीय भाषाओं को ही नहीं हटाया गया है, बल्कि जनजातीय भाषाओं की सूची में भी असुर, बिरहोर और माल्तो जैसी महत्वपूर्ण भाषाओं को शामिल नहीं किया गया है। यह राज्य की भाषाई विविधता और सांस्कृतिक पहचान की अनदेखी है. प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि संथाल परगना के किसी भी जिले में क्षेत्रीय भाषा के रूप में कुरमाली को शामिल नहीं किया गया, जबकि इस भाषा को बोलने वालों की संख्या लाखों में है। इससे क्षेत्रीय भाषा बोलने वाले अभ्यर्थियों में निराशा है।
कांग्रेस प्रभारी के. राजू से आग्रह किया गया कि झारखंड की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करते हुए सभी जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को जेटीईटी 2026 में उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए। साथ ही समग्र विचार कर इन भाषाओं को परीक्षा में शामिल करते हुए परीक्षा आयोजित कराने की मांग की गई।
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

