श्रीनगर 01 June (Rns)- जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ लगातार सख्त होती कार्रवाई से बौखलाई पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (Inter-Services Intelligence) अब एक नई रणनीति के तहत भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में घुसपैठ की कोशिश कर रही है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, आईएसआई ने अपने समर्थक नेटवर्क और ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को मुख्यधारा की राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होकर काम जारी रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचा जा सके और आतंकी तंत्र को नया आवरण प्रदान किया जा सके।
सूत्रों के मुताबिक, हाल के महीनों में हुई कई गिरफ्तारियों और पूछताछ के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं कि कुछ संदिग्ध तत्व राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक पार्टियों से जुड़े होने का दावा कर रहे थे। जांच एजेंसियां इस पहलू की गंभीरता से पड़ताल कर रही हैं।
आतंकवाद को ‘स्थानीय आंदोलन’ दिखाने की कोशिश
सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि आईएसआई का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में जारी आतंकवादी गतिविधियों को सीमा पार से संचालित प्रॉक्सी वॉर के बजाय स्थानीय असंतोष का रूप देना है। इसके लिए ऐसे संगठनों को फिर से सक्रिय करने की कोशिश की जा रही है, जो 1990 और 2000 के दशक में घाटी में आतंक का प्रमुख चेहरा रहे थे।
एजेंसियों के अनुसार, इन प्रयासों का मकसद आतंक के वित्तपोषण, भर्ती और नेटवर्किंग को राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों की आड़ में छिपाना भी हो सकता है।
पुराने आतंकी संगठनों को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश
खुफिया रिपोर्टों में संकेत मिले हैं कि आईएसआई ने कुछ निष्क्रिय और कमजोर पड़ चुके आतंकी संगठनों को फिर से सक्रिय करने का प्रयास तेज कर दिया है। इनमें अल-उमर मुजाहिदीन, अल-बदर और तहरीक-उल-मुजाहिदीन जैसे संगठन शामिल बताए जा रहे हैं, जिन्होंने अतीत में जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने पर हिंसा को अंजाम दिया था।
सुरक्षा एजेंसियां इन संगठनों से जुड़े पुराने नेटवर्क, वित्तीय गतिविधियों और सोशल मीडिया संपर्कों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।
राजनीतिक पहचान का दुरुपयोग करने का आरोप
अधिकारियों के अनुसार, कई मामलों में संदिग्ध तत्वों ने सुरक्षा जांच या तलाशी अभियान के दौरान खुद को किसी राजनीतिक दल से जुड़ा बताकर जांच से बचने की कोशिश की। हालांकि एजेंसियों का कहना है कि किसी भी राजनीतिक दल की सदस्यता कानून से ऊपर नहीं है और यदि किसी व्यक्ति की आतंक या राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्तता पाई जाती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है।
सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ जारी अभियानों और स्थानीय स्तर पर घटते समर्थन के कारण आईएसआई के नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तान समर्थित तंत्र अब नए तरीकों से अपनी मौजूदगी बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि, राजनीतिक आवरण में छिपे नेटवर्क या आतंकी फंडिंग के प्रयासों पर कड़ी नजर रखी जा रही है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हर पहलू की गहन जांच की जा रही है।

