रायपुर ग्रामीण 4 जून (आरएनएस) नगर में नशे के कारोबार पर लगाम लगाने में नाकामी के आरोप में थाना प्रभारी के निलंबन ने गोबरा नवापारा की सड़कों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कार्रवाई हो चुकी है तो फिर शराब, सट्टा और गांजा का कथित नेटवर्क अब भी आखिर किसके भरोसे चल रहा है।
रायपुर। अवैध नशे के कारोबार के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए पुलिस अधीक्षक रायपुर (ग्रामीण) श्वेता श्रीवास्तव सिंह ने गोबरा नवापारा थाना प्रभारी दीपेश जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। बताया जा रहा है कि नशे के खिलाफ प्रभावी अंकुश लगाने में विफल रहने और संदिग्ध आचरण के आरोपों के चलते यह कार्रवाई की गई। आदेश जारी होते ही पूरे नगर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
थाना प्रभारी के निलंबन के बाद स्थानीय लोगों ने नगर में लंबे समय से संचालित हो रहे अवैध कारोबारों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। नागरिकों का कहना है कि अवैध शराब बिक्री का मामला किसी एक व्यक्ति या एक स्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर और आसपास के क्षेत्रों के कई ढाबों, डेली नीड्स दुकानों, ठेलों और विभिन्न वार्डों तक इसका नेटवर्क फैला हुआ है। इसके साथ ही सट्टा और गांजा कारोबार संचालित होने की शिकायतें भी लगातार सामने आती रही हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि समय-समय पर कार्रवाई जरूर होती है, लेकिन उसका असर स्थायी नहीं दिखता। नगर में यह चर्चा भी तेज है कि कुछ प्रभावशाली लोगों और राजनीतिक संरक्षण के कारण कई अवैध धंधे बेखौफ तरीके से संचालित होते रहते हैं। हालांकि इन आरोपों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अब जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि अवैध गतिविधियां इतने व्यापक स्तर पर फैली हुई हैं तो उनके खिलाफ राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों की ओर से अपेक्षित विरोध क्यों नहीं दिखाई देता। लोगों का मानना है कि केवल एक अधिकारी के निलंबन से समस्या का समाधान नहीं होगा। पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों की पहचान और लगातार कार्रवाई ही इस समस्या का स्थायी समाधान बन सकती है।
फिलहाल, नवापारा में कार्रवाई की शुरुआत तो हो चुकी है, लेकिन जनता की नजर अब इस बात पर टिकी है कि नशे के इस कथित नेटवर्क पर अगला वार कब होगा और इसके पीछे छिपे चेहरे आखिर कब बेनकाब होंगे।

