लखनऊ 5 जून (आरएनएस ): उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (यूपीईआरसी) ने राज्य की ऊर्जा जरूरतों को दीर्घकालिक रूप से पूरा करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय को मंजूरी दी है। इसके तहत भूटान के खोरलोछू जलविद्युत स्टेशन से 511 मेगावाट जलविद्युत के आयात की योजना को स्वीकृति प्रदान की गई है।आयोग ने उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) और टाटा पावर ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड (टीपीटीसीएल) के बीच 30 वर्षों के विद्युत बिक्री समझौते को मंजूरी दी है। इस समझौते के तहत भारत-भूटान सीमा पर बिजली की दर 6.75 रुपये प्रति यूनिट (फ्लैट टैरिफ) तय की गई है, जो पूरी अवधि के लिए बिना किसी वार्षिक वृद्धि के स्थिर रहेगी।जानकारी के अनुसार, खोरलोछू हाइड्रो पावर लिमिटेड (केएचपीएल) में भूटान की ड्रुक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड की 60 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी है, जबकि शेष 40 प्रतिशत हिस्सेदारी टाटा पावर ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड के पास है। यह परियोजना एक रणनीतिक सीमा-पार ऊर्जा साझेदारी के रूप में विकसित की गई है।यूपीईआरसी की पीठ, अध्यक्ष अरविंद कुमार एवं सदस्य संजय कुमार सिंह ने अपने निर्णय में कहा कि यह समझौता राज्य की गर्मियों में चरम बिजली मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही यह हाइड्रो परचेज ऑब्लिगेशन की पूर्ति में भी सहायक होगा और उपभोक्ताओं को दीर्घकालिक मूल्य स्थिरता प्रदान करेगा।यूपीपीसीएल द्वारा विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 86(1)(बी) के तहत इस बिजली खरीद समझौते और स्रोत को मंजूरी देने का अनुरोध किया गया था। प्रस्ताव के अनुसार, 1 मई 2030 से हर वर्ष मई से अक्टूबर की अवधि में 511 मेगावाट बिजली की आपूर्ति की जाएगी।आयोग ने बताया कि इस टैरिफ की गणना केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) के टैरिफ विनियम 2024 के अनुसार की गई है, जिसमें 6.47 रुपये प्रति किलोवाट घंटा बेस टैरिफ और 0.28 रुपये प्रति किलोवाट घंटा ट्रांसमिशन चार्ज शामिल है। इस प्रकार कुल अंतिम दर 6.75 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित हुई हैसमझौते के अनुसार भारत-भूटान सीमा तक ट्रांसमिशन चार्ज, हानियां और परिचालन लागत टाटा पावर ट्रेडिंग कंपनी द्वारा वहन की जाएगी, जबकि सीमा के बाद का नेटवर्क शुल्क और राज्य ट्रांसमिशन हानियां यूपीपीसीएल द्वारा वहन की जाएंगी। ट्रेडिंग मार्जिन 5 पैसे प्रति यूनिट तय किया गया है, जो पहले से ही टैरिफ में शामिल है।योजना के तहत खोरलोछू परियोजना से प्रतिवर्ष 1,748 मिलियन यूनिट बिजली की आपूर्ति होगी, जिसमें चार घंटे की स्टोरेज क्षमता भी शामिल है। यह आपूर्ति गर्मियों के पीक डिमांड पीरियड के अनुरूप संरचित की गई है, जिससे राज्य की बिजली व्यवस्था को स्थिरता मिलेगी।आयोग ने अपने निष्कर्ष में कहा कि यह दीर्घकालिक, स्थिर और समावेशी टैरिफ व्यवस्था उत्तर प्रदेश को ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे आने वाले दशकों में बिजली आपूर्ति अधिक भरोसेमंद और पूर्वानुमेय बनी रहेगी।
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