लखनऊ 5 जून (आरएनएस ) : कमिश्नरेट लखनऊ में साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों के बीच नव नियुक्त पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित एवं जागरूक करने के उद्देश्य से “साइबर जागरूकता” विषय पर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 05 जून 2026 को संगोष्ठी सदन, रिजर्व पुलिस लाइन्स में आयोजित हुआ, जिसमें 71 रिक्रूट आरक्षियों ने प्रतिभाग किया।यह प्रशिक्षण कार्यक्रम संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) अपर्णा कुमार, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) बबलू कुमार तथा पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) अमित कुमावत के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जबकि इसका संचालन सहायक पुलिस आयुक्त (साइबर अपराध) सुशील यादव के पर्यवेक्षण में किया गया।कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नव चयनित पुलिसकर्मियों को साइबर अपराधों की प्रारंभिक पहचान, डिजिटल साक्ष्य संरक्षण, शिकायत निस्तारण प्रक्रिया तथा फस्र्ट रिस्पॉन्डर के रूप में उनकी भूमिका के प्रति दक्ष बनाना था, ताकि साइबर अपराधों पर त्वरित और प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।प्रशिक्षण सत्र का संचालन साइबर सेल के विशेषज्ञ प्रशिक्षकों उपनिरीक्षक राकेश मिश्रा एवं महिला उपनिरीक्षक आरती वर्मा द्वारा किया गया। उन्होंने साइबर ठगी के बदलते स्वरूप, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की पहचान, डिजिटल साक्ष्य प्रबंधन तथा साइबर अपराधों की जांच प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।कार्यशाला में प्रतिभागियों को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (हृष्टक्रक्क), संचार साथी पोर्टल, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (ढ्ढ4ष्ट), स्ह्लशश्चहृष्टढ्ढढ्ढ.शह्म्द्द तथा ङ्ख॥ह्रढ्ढस् ष्ठशद्वड्डद्बठ्ठ रुशशद्मह्वश्च जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्म की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही साइबर हेल्पलाइन 1930 के प्रभावी उपयोग और शिकायत निस्तारण प्रक्रिया पर भी विशेष प्रशिक्षण दिया गया।प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से साइबर अपराधों की पहचान, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया तथा त्वरित कार्रवाई के चरणों का लाइव डेमो दिया गया। डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण और फील्ड स्तर पर फस्र्ट रिस्पॉन्डर की भूमिका पर विशेष रूप से बल दिया गया।अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान समय में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए पुलिस बल का तकनीकी रूप से सक्षम होना अत्यंत आवश्यक है। इसी क्रम में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य में भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, जिससे पुलिसकर्मियों की क्षमता संवर्धन के साथ साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।
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