पर्यावरण दिवस पर कागजी वृक्षारोपण न हो वो धरातल पर उगें- उज्जवल
प्रयागराज 5 जून (आरएनएस)। उत्तर प्रदेश को वर्ष 2047 तक ‘हरित प्रदेशÓ बनाने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संकल्प को आइना दिखाते हुए वरिष्ठ नेता पूर्व सांसद कुंवर रेवती रमन सिंह ने प्रयागराज में पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि प्रयागराज जिला की आबादी बढ़ी और पेड़ों की संख्या घटीं। उन्होंने कहा कि बीते महाकुंभ में करोड़ों रुपए से जो विदेशी पेड़़ लगाऐं गये उसकी जगह देशी पारम्परिक पेड़़ लगायें गये होते तो आज इस भीषण गर्मी में शहर तप न रहा होता लोगों को छाया के साथ शुद्ध हवा मिलतीं पर्यावरण संरक्षण होता।
उन्होंने कहा कि आगामी महाकुंभ और जनपद की अन्य सड़कों के किनारे ताड़ व खजूर जैसे विदेशी पेड़ों के बजाय आम, महुआ, पीपल और बरगद जैसे पारंपरिक व पर्यावरण अनुकूल वृक्ष लगाए जाएं।
सांसद प्रतिनिधि विनय कुशवाहा ने बताया कि पूर्व सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह ने मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि प्रयागराज में महाकुंभ के मद्देनजर ‘हरित कुंभÓ की बात तो की जा रही है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर सड़कों के किनारे केवल एक ही प्रकार के पेड़ (जैसे ताड़, खजूर, गुलमोहर आदि) लगाए जा रहे हैं।
सांसद प्रतिनिधि ने बताया कि उदाहरण के तौरपर पहले महात्मा गांधी मार्ग पिपरिया रोड़ कहलाती थीं क्यों सड़क़ के दोनों पीपल के पेड़़ थे। रामबाग स्टेशन रोड़ पर ईमली के पेड़ थे, प्रयागराज-मिर्जापुर मार्ग पर पहले आम, महुआ और पीपल के घने वृक्ष हुआ करते थे। सड़क चौड़ीकरण के दौरान इन सभी पारंपरिक वृक्षों को काट दिया गया और उनकी जगह गुलमोहर व ताड़ जैसे पेड़ लगा दिए गए। ताड़, खजूर और गुलमोहर जैसे पेड़ स्थानीय पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं हैं। ये पेड़ न तो पर्याप्त छाया देते हैं और न ही स्थानीय पक्षियों व जीवों को आश्रय प्रदान करते हैं।
कुंवर साहब ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि पर्यावरण की वास्तविक सुरक्षा के लिए प्रयागराज में बड़े पैमाने पर पारंपरिक और दीर्घायु वृक्षों का रोपण किया जाना चाहिए।
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