कावारत्ती,08 जून(आरएनएस)। मुस्लिम बहुल केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप में 47 सालों में पहली बार लाइसेंस प्राप्त दुकानों के माध्यम से शराब की बिक्री होगी। इसके पीछे कारण केंद्र सरकार द्वारा लक्षद्वीप निषेध विनियमन, 1979 को निरस्त करना है। इस कानून ने लागू होने के बाद से लक्षद्वीप को शराब से मुक्त रखा था। कवरत्ती और बंगाराम द्वीपों पर सरकारी बार और पर्यटक रिसॉर्ट्स के लिए शराब महज अपवाद रहे हैं।
सरकार ने लक्षद्वीप निषेध विनियमन, 1979 को 5 जून को जारी राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से निरस्त कर दिया है। उसकी जगह नया उत्पाद शुल्क विनियम, 2026 लागू किया जा रहा है। इसके तहत लाइसेंसिंग प्रणाली लागू की गई है, जिसके अंतर्गत शराब के निर्माण, कब्जे, आयात, निर्यात, परिवहन, खरीद, बिक्री और उपभोग को नियंत्रित किया जाएगा। सरकारी निगमों और एजेंसियों को भी शराब के आयात और खुदरा बिक्री के लिए लाइसेंस की अनुमति दी गई है।
हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह खुला शराब बाजार नहीं होगा। शराब से संबंधित टैक्स की दरें काफी अधिक रखी गई हैं। भारतीय निर्मित विदेशी शराब (आईएमएफएल) और विदेशी शराब पर उत्पाद शुल्क 400 प्रतिशत, बीयर पर 200 प्रतिशत और वाइन पर 80 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। इससे वहां शराब खरीदना काफी महंगा होगा। बता दें कि दिल्ली में आईएमएफएल, बीयर, वाइन और आयातित विदेशी शराब पर 25 प्रतिशत ही वैट लगाया जाता है।
नए कानून के तहत लक्षद्वीप पूरी तरह से शराब का बड़ा बाजार नहीं बनेगा। सरकार ने लक्षद्वीप के प्रशासक को व्यापक अधिकार दिए हैं। वे केंद्र शासित प्रदेश में शराब की खरीद, बिक्री, सेवन और भंडारण पर सीमाएं तय कर सकते हैं। इसी तरह जरूरत पडऩे पर पूरे लक्षद्वीप या उसके किसी हिस्से में शराब की बिक्री पर रोक भी लगा सकते हैं। इसके साथ ही 21 वर्ष से कम आयु के लोगों को शराब बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
लक्षद्वीप 36 द्वीपों का एक समूह है। इनमें से 10 द्वीप बसे हुए हैं, जिनमें अगत्ती, अमिनी, एंड्रोट, बितरा, चेटलाट, कदमत, कल्पेनी, कावारत्ती, किल्टन और मिनिकॉय शामिल हैं। विदेशी और भारतीय पर्यटकों को विशेष परमिट प्राप्त करने के बाद ही द्वीप समूह का दौरा करने की अनुमति है, जिसमें विदेशी पर्यटकों के लिए अगाटी, बंगाराम और कदमत द्वीप ही सीमित हैं। ऐसे में यहां अब तक पर्यटकों की पहुंच बहुत ही कम रही है।
लक्षद्वीप में 97 प्रतिशत आबादी मुसलमानों की है, जो भारत के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में मुस्लिम आबादी का सबसे बड़ा अनुपात है। इसके अलावा यहां की बड़ी आबादी अनुसूचित जनजाति यानी एसटी श्रेणी में भी आती है। यहां की कुल आबादी 64,473 में 95 प्रतिशत यानी 61,120 लोग अनुसूचित जनताति वर्ग से संबंधित है। इसी वहज से 1979 में शराबबंदी लागू की गई थी, क्योंकि बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी में शराब को वर्जित माना जाता है।
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