कोलकाता 12 जून (आरएनएस)। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की कमान संभालते ही शुभेंदु अधिकारी ने प्रशासनिक और वित्तीय सुधारों को लेकर बड़े और कड़े फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार द्वारा धर्म के आधार पर दिए जाने वाले विभिन्न भत्तों को बंद करने का निर्देश देने के बाद, राज्य के पूजा कमेटियों और क्लबों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या भाजपा सरकार दुर्गा पूजा के लिए मिलने वाले सरकारी अनुदान को भी पूरी तरह बंद कर देगी शुक्रवार को न्यूटाउन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार का रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूजा अनुदान बंद नहीं होगा, लेकिन अब यह खैरात की तरह सबको नहीं बांटा जाएगा। संवाददाता सम्मेलन में पूजा अनुदान से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कह, “जो क्लब और कमेटियां सरकारी वित्तीय सहायता के भरोसे ही दुर्गा पूजा का आयोजन करती हैं, उन्हें यह अनुदान मिलता रहेगा। लेकिन जिन बड़े क्लबों को इस पैसे की कोई जरूरत नहीं है, उन्हें अब से कोई सरकारी मदद नहीं दी जाएगी। सरकार का पैसा जनता का पैसा है, इसका सही इस्तेमाल होना चाहिए। मुख्यमंत्री के इस बयान से साफ है कि अब से राज्य सरकार क्लबों के आर्थिक फंड और उनकी वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने के बाद ही अनुदान राशि जारी करेगी। कोलकाता और जिलों के जो बड़े बजट वाले नामी क्लब कॉरपोरेट स्पॉन्सरशिप और विज्ञापनों से करोड़ों रुपये जुटाते हैं, उन्हें इस बार सरकारी खजाने से कोई मदद नहीं मिलने वाली है।
गौरतलब है कि सत्ता संभालने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ कर दिया था कि उनकी सरकार तुष्टिकरण की राजनीति के सख्त खिलाफ है। इसी के तहत उन्होंने पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार द्वारा शुरू किए गए धर्म आधारित कई विशेष भत्तों पर तुरंत रोक लगाने का आदेश दिया था। सरकार के इस कदम के बाद से ही राज्य के हजारों क्लबों में यह डर बैठ गया था कि कहीं बंगाल के सबसे बड़े उत्सव ‘दुर्गा पूजाÓ को मिलने वाला सरकारी फंड भी न छीन जाए। हालांकि, मुख्यमंत्री के नए फॉर्मूले ने छोटे और बजट संकट से जूझ रहे क्लबों को बड़ी राहत दी है, जबकि वीआईपी और रसूखदार बड़े क्लबों के लिए सरकारी मदद के रास्ते बंद कर दिए हैं।
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