नईदिल्ली ,15 जून(आरएनएस)। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सोमवार को ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (एलआरएलएसीएम) का सफल उड़ान परीक्षण किया। इस परीक्षण के दौरान मिसाइल के प्रदर्शन पर पैनी नजर रखी गई। इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज, चांदीपुर द्वारा तैनात किए गए विभिन्न ट्रैकिंग उपकरणों से मिले डेटा के अनुसार, टेस्ट के सभी लक्ष्य पूरी तरह से हासिल कर लिए गए।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस परीक्षण के दौरान मिसाइल ने अपने सभी मिशन उद्देश्यों को पूरा किया। उड़ान के दौरान मिसाइल के प्रणोदन, गाइडेंस, नेविगेशन, कंट्रोल सिस्टम और वॉरहेड डिलीवरी जैसी बेहद महत्वपूर्ण तकनीकों का कड़े मानकों पर सत्यापन किया गया। डीआरडीओ द्वारा भारतीय उद्योगों की मजबूत भागीदारी के साथ विकसित की गई इस मिसाइल और इसके सभी सब-सिस्टम का सफल परीक्षण आत्मनिर्भर भारत और एक मजबूत राष्ट्रीय रक्षा इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में एक और बड़ा व ऐतिहासिक कदम है।
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ की टीम और इसमें शामिल इंडस्ट्री पार्टनर्स को बधाई दी। परीक्षण के दौरान रक्षा सचिव और डीआरडीओ के चेयरमैन राजेश कुमार सिंह सहित भारतीय नौसेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
क्यों खास है यह मिसाइल?
1.यह मिसाइल 1,500 किलोमीटर तक की दूरी पर मौजूद लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है।
2.इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह दागने के बाद हवा में मंडराते हुए सही वक्त का इंतजार कर सकती है और टारगेट की पहचान पक्की होते ही उस पर सटीक हमला करती है।
3.लंबी दूरी तक निरंतर उड़ान बनाए रखने के लिए इसमें टर्बोफैन या टर्बोजेट इंजन का इस्तेमाल किया गया है।
4.रास्ते में भटकाव से बचने के लिए इसमें एडवांस्ड इनर्शियल नेविगेशन के साथ सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम दिया गया है।
5.अंतिम चरण में सटीक प्रहार के लिए इसमें टर्मिनल सीकर और टेरेन-कंटूर मैचिंग तकनीक का उपयोग होता है।
6.यह मिसाइल रडार की नजरों से बचने के लिए जमीन से बहुत कम ऊंचाई पर उड़ती है।
7.यह मिसाइल पारंपरिक और परमाणु दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम है।
8.इस मिसाइल के सभी हिस्से भारत में ही डीआरडीओ की बेंगलुरु लैब और भारतीय कंपनियों द्वारा मिलकर बनाए गए हैं।
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