New Delhi 16 June (Rns) /- देश के भीतर नशे का एक ऐसा खतरनाक नेटवर्क सक्रिय हो चुका है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. मणिपुर से शुरू होने वाला नया ड्रग कॉरिडोर देश के अन्य राज्यों तक फैल रहा है. इस ‘मणिपुर ड्रग कॉरिडोर’ के जरिए म्यांमार और नॉर्थ-ईस्ट से नशे की खेप देश के दूसरे कोने यानी राजस्थान तक पहुंच रही है. हाल के महीनों में राजस्थान एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने कई ऐसी खेप पकड़ी हैं, जिनके तार सीधे मणिपुर और पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़े मिले हैं. जांच में सामने आया है कि तस्कर अब पुराने रास्तों को छोड़कर नए नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं. जानिए आखिर ये नेटवर्क कैसे काम करता है और इसके तार कहां तक जुड़े हैं.
कभी पाकिस्तान सीमा और अफगानिस्तान से जुड़े गोल्डन क्रेसेंट नेटवर्क को सबसे बड़ा खतरा माना जाता था. लेकिन तालिबान के शासन के बाद इस इलाके में अफीम की खेती पर प्रतिबंध लगा तो म्यांमार दुनिया में अफीम की अवैध खेती का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया. म्यांमार से अफीम की सप्लाई मणिपुर होते हुए देशभर में होने लगी है. यही वजह है कि राजस्थान की सुरक्षा एजेंसियों को इस खतरनाक ट्रेंड का पता लगा है. एक ऐसा नेटवर्क, जो कई हजारों किलोमीटर तय फैल चुका है. जांच एजेंसियों का मानना है कि ड्रग्स माफिया अब उन रूट का इस्तेमाल कर रहे हैं, जहां निगरानी कम है.
म्यांमार, लाओस और थाईलैंड का इलाका गोल्डन ट्रायंगल कहलाता है. यह क्षेत्र लंबे समय से अफीम और सिंथेटिक ड्रग्स के उत्पादन के लिए कुख्यात रहा है. अब इसी क्षेत्र से निकलने वाली अफीम की खेप मणिपुर के रास्ते देश में प्रवेश कर रही है. मणिपुर से शुरू होने वाला यह नेटवर्क असम, बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से होकर राजस्थान पहुंचता है. तस्कर ट्रकों की स्टेपनी, चेसिस और गुप्त तहखानों में नशे का सामान छिपाकर हजारों किलोमीटर की दूरी तय करते हैं

