नईदिल्ली ,17 जून(आरएनएस)। अमेरिका ने फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के बीच दोहरा झटका दिया है। अमेरिकी युद्ध विभाग ने यूएस इंडो-पैसिफिक कमान (यूएसइंडोपाकॉम) को उसके आधिकारिक तौर पर अपने मूल नाम यूएस पैसिफिक कमान (यूएसपीएकॉम) करने की घोषणा की है। इसके अलावा, कमान ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपने परिचालन क्षेत्र के संबंध में आधिकारिक वेबसाइट पर भारत का गलत नक्शा प्रदर्शित किया है, जिसमें कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया गया है।
कमान ने एक्स पर नया लोगो साझा कर लिखा कि युद्ध विभाग ने यूएस पैसिफिक कमान का नाम फिर से बहाल कर यूएस पैसिफिक कमान किया है। कमान ने बताया कि नाम बदलने के बाद भी यूएसपीएकॉम की जिम्मेदारी अमेरिका के पश्चिमी तट के समुद्री इलाकों से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक बिल्कुल वैसी ही रहेगी। कमान का मूल मिशन और क्षेत्रीय सहयोगियों-साझेदारों के साथ मिलकर स्वतंत्र और खुला क्षेत्र बनाए रखने की प्रतिबद्धता में कोई बदलाव नहीं है।
कमान का बदलाव सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रहा। उसने अपनी आधिकारिक वेबसाइट में जिम्मेदारी क्षेत्र मानचित्र अनुभाग में भारत का गलत नक्शा प्रदर्शित किया है, जिसमें पूरा जम्मू-कश्मीर शामिल नहीं है। अमेरिका ने नक्शे में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) को पाकिस्तान का इलाका दिखाया है। नक्शे में भारत को हल्के हरे रंग से दिखाया गया है, जिसमें जम्मू-कश्मीर के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों (पीओके और अक्साई चिन) को भारत से अलग रंग में दिखाया है।
अमेरिकी कमान का यूएसपीएकॉम नाम 1 जनवरी, 1947 को राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन ने लागू किया था, जो 70 से अधिक वर्षों तक यूएसपीएकॉम रहा। यह अमेरिका की सबसे पुरानी और बड़ी कमांड है। इसने दूसरे विश्व युद्ध के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा स्थापित करने में अपनी अहम भूमिका निभाई है। ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान तत्कालीन अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने 2018 में यूएसपीएकॉम का नाम बदलकर इसमें भारत की भूमिका को दर्शाते हुए इंडो जोड़ा था।
इसे आसान भाषा में समझें तो बदलाव एक तरह से अमेरिका का चीन-पाकिस्तान की तरफ नरम रुख दिखाता है। दरअसल, अमेरिका ने चीन को संतुलित करने के लिए प्रशांत क्षेत्र में भारत को शामिल कर हिंद-प्रशांत महासागर में चीनी नौसेना प्रभाव को रोकने का संदेश दिया था। तब यह साफतौर पर चीन-केंद्रित अमेरिका-भारत-जापान-ऑस्ट्रेलिया के क्वाड समूह और स्वतंत्र इंडो-प्रशांत रणनीति का हिस्सा था। ट्रंप की बीजिंग की यात्रा के बाद यह उनके चीन के प्रति बदले नजरिए को दिखाता है।
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