दुर्ग, 19 जून (आरएनएस)। कृषकों को समय पर एवं गुणवत्तायुक्त व पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना कृषि विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वर्तमान में जिले में यूरिया एवं अन्य उर्वरकों का वितरण शासन के निर्देशानुसार किया जा रहा है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के वैज्ञानिकों का हवाला देकर बताया कि धान की फसल के लिए खाद के रूप में एनपीके के विभिन्न ग्रेड जैसे 12:32:16 10:26:26, 16:16:16, 20:20:0:13, 20:20:00, 14:35:14, 28:28:00, 16:20:0:13, ञ्जस्क्क इत्यादि को सर्वश्रेष्ठ और संतुलित खाद माना गया है। थान सहित किसी भी अन्य फसल के लिए तीन प्रमुख पोषक तत्व नाईट्रोजन फास्फोरस और पोटाश अत्यंत अनिवार्य है। एनपीके खाद में ये तीनों तत्व एक निश्चित और संतुलित अनुपात में मिश्रित होते है। जबकि डीएपी 18:46:0 में केवल नाइट्रोजन (18प्रतिशत) और फास्फोरस (40प्रतिशत) होता है. इसमें पोटाश शून्य होता है। इसके विपरीत, एनपीके में तीनों मुख्य तत्व एक ही दाने में मौजूद होते हैं। धान के पौधों की प्रारंभिक वृद्धि, जड़ों के विकास, रोगों से लडऩे की क्षमता और दानों में चमक व वैजन बढ़ाने के लिए पोटाश की अत्यंत आवश्यकता होती है। डीएपी डालने पर किसानों को अलग से म्युरेट ऑफ पोटाश खरीदना पड़ता है, जबकि एनपीके डालने से पोटाश की आवश्यकता प्राकृतिक रूप से पूरी हो जाती है। साथ ही एसएसपी (सिंगल सुपर फास्फेट) भी धान के लिए एक बेहतरीन और वैज्ञानिक रूप से अनुशसित उर्वरक है। एसएसपी के उपयोग से फसल को न केवल फारफोरस मिलता है, बल्कि इसमें मौजूद सल्फर और कैल्शियम पौधों के संपूर्ण विकास, जड़ों की मजबूती और दानों के भराव में अत्यत सहायक होते है। आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए विभाग कृषकों को नैनो यूरिया (तरल) और नैनो डीएपी (तरल) के उपयोग की सलाह देता है। यह पारंपरिक बोरी वाले खादों की तुलना में अत्यधिक प्रभावी, सस्ती और पर्यावरण अनुकूल तकनीक है। नैनो यूरिया का सीधे पौधों के पत्तों पर छिड़काव (फोलियर स्प्रे) करने से नाइट्रोजन सीधे पौधों द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है. जिससे यूरिया की बर्बादी रुकती है और मिट्टी की सेहत बनी रहती है। नैनो डीएपी के उपयोग से पौधों में फास्फोरस और नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ती है, जिससे फसल का शुरुआती उठाव (वानस्पतिक वृद्धि) और जड़ों का विकास अत्यंत तीव्र व सुदृढ होता है। इसके उपयोग से फसल की लागत में कमी आती है और उपज में वृद्धि होती है। यह भ्रति पूरी तरह निराधार है कि एनपीके केवल सब्जियों के लिए है। एनपीके, एसएसपी और नैनो उर्वरकों का संतुलित उपयोग धान के पौधों को असमय गिरने से बचाता है और ब्लास्ट (झुलसा रोग) जैसी बीमारियों के प्रति ‘संवेदनशीलता को कम करता है नकली एवं घटिया खाद-बीज की बिक्री को रोकने के लिये जिला स्तरीय उडऩदस्ता टीम का गठन किया गया है जो निजी विक्रेताओं और समितियों की निरंतर जांच कर रही है, ताकि कृषकों को गुणवत्ता युक्त बीज /उर्वरक उपलब्ध कराया जा सके। अब तक जिले के 135 निजी एवं सहकारी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया जा चुका है। जांच के दौरान स्टॉक संधारण में गडबडी, उर्वरक नियंत्रण संबंधी नियमों के उल्लंघन करने जैसी अनियमितताएं पाए जाने पर 07 विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, एवं 06 विक्रय केन्द्रों पर उर्वरक अनुज्ञप्ति में अतिरिक्त स्त्रोत समावेश किये बिना व अधिक मूल्य पर विक्रय करते पाये जाने पर उर्वरक जब्ती कर प्रकरण कलेक्टर न्यायालय में भेजा गया है। वहीं 05 विक्रय केंद्रों में अमानक उर्वरक का विक्रय किये जाने के कारण विक्रय प्रतिबंद कर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। वर्तमान वैश्विक स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग सभी किसान भाइयों से अपील करता है कि खरीफ सीजन के दौरान धान की बोनी/रोपाई करते समय किसी भी प्रकार के भ्रामक प्रचार या अफवाहों में न आए। एनपीके खाद धान की फसल के लिए न केवल पूरी तरह सुरक्षित है, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से डीएपी की तुलना में अधिक संतुलित पोषण प्रदान करती है साथ ही हरी खाद (बेंचा, मूंग) नील हरित काई जैसे जैविक उर्वरकों का उपयोग कर भूमि की उर्वरक क्षमता बढ़ा सकते है। किसान भाई समितियों में उपलब्ध एनपीके स्टॉक का निसंकोच उठाव करें और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार ही खाद का प्रयोग करें। किसी भी प्रकार की तकनीकी जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी या कृषि विभाग से संपर्क कर सकते हैं।
०
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

