भिलाइ,21 जून (आरएनएस)। देश भर में अपने गीतों के लिए चर्चित अठ्यासी वर्षीय प्रसिद्ध कवि मोहन भारतीय ने भिलाई का गौरव बढ़ाया। वे केन्द्रीय सिविल सेवा में सहायक निदेशक रहे। चढ़ती जवानी के दिनों मेकेनिकल इंजीनियर बनकर वे भिलाई आए।1939 में आगरा में जन्में मोहन भारतीय आज भी सक्रिय साहित्यकार है। दिनांक 20/06/2026 के भावपूर्ण आत्मीय समारोह में अगासदिया परिवार ने मोहन भारतीय को स्मृति चिन्ह शाल देकर सम्मानित किया।नव आगमन मासिक के सम्पादक डॉ. परदेशीराम वर्मा ने कहा कि हमारी पीढ़ी के लेखक जब लिखने का अभ्यास कर रहे थे तब मोहन भारतीय जी स्थापित कवि के रूप में देश भर में चर्चित थे। वह दौर दानेश्वर शर्मा, रमाशंकर तिवारी डॉ. मनराखन लाल साहू रवि श्रीवास्तव, संतोष झांझी का दौर था जिसमें चमकते सितारे थे मोहन भारतीय। उन्होंने अपार यश प्राप्त किया।नव आगमन के जून अंक का विमोचन इस अंक में सम्मिलित कवि कमलेश चंद्राकर, शायर अब्दुल कलाम की उपस्थिति में मोहन भारतीय एवं संपादक मंडल ने किया। इस अंक में धमतरी के चर्चित कवि भगवती सेन एवं दुर्ग के पुरानी पीढ़ी के बहुत सम्मानित कवि और संपादक पतिराम साव सहित धमतरी के डूमन लाल ध्रुव, कमलेश चंद्राकर, हेमंत मढ़रिया की रचनाए। सम्मिलित है। राज्य सम्मान प्राप्त कृषि पंडित सुंखराम वर्मा को भी अंक में याद किया गया है।संपादकीय सहयोगी अब्दुल कलाम, महेश वर्मा, राजेन्द्र साहू, नीतीश वर्मा तथा महंत अंतराम समाजसेवी रामसेवक वर्मा और मोहन भारतीय जी का परिवार विमोचन समारोह में उपिस्थत रहा। मैत्री नगर, भिलाई के भारतीय निवास में भावपूर्ण विमोचन समारोह के अवसर पर महंत अंतराम ने संत पवन दीवान का गीत लहर लहर लहरावय मोर महानदी के पानी सुनाया। मोहन भारतीय ने अपना प्रसिद्ध गीत ‘अच्छा किया कि साथी तुमनेÓ सुनाया। कमलेश चंद्राकर ने बालगीत तथा अब्दुल कलाम ने गजल का पाठ किया।वरिष्ठ नागरिक एवं चिंतक राम सेवक वर्मा ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि मेरी उम्र भी चैरासी वर्ष की है। मैं भिलाई इस्पात संयंत्र से रिटायर हुआ। मैं पचास वर्षों से सरल सहज मोहन भारतीय जीके गीतों को सुनता रहा हंू। वे अद्भुत गीतकार और उदार समाज सेवी हैं। मोहन भारतीय के सुपुत्र नवीन जैन ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिन लेखकों को बचपन से हम सुनते-पढ़ते हुए बड़े हुए उनमें डॉ. परदेशीराम वर्मा जी का सतत सम्पर्क हमारे परिवार और पापा जी के साथ हैं। अब उस दौर के कुछ ही लेखक भिलाई में बचे हैं। अगासदिया परिवार के प्राप्ति आभार मानते हुए उन्होंने भिलाई की साहित्य बिरादरी को याद किया।
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