दुर्ग,22 जून (आरएनएस)। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) एवं कृषि विभाग के सहयोग से ग्राम पेंड्रावन, जनपद पंचायत धमधा की महिलाओं ने जैविक खेती को अपनाकर आत्मनिर्भरता और सफलता की नई मिसाल प्रस्तुत की है। मातृछाया उत्पादक महिला समूह की सदस्याएं आज न केवल स्वयं प्राकृतिक खेती कर रही हैं, बल्कि अन्य किसानों को भी जैविक कृषि के लिए प्रेरित कर रही हैं।समूह की महिलाओं ने बताया कि बिहान से जुडऩे से पहले वे धान, गेहूं, चना एवं सब्जियों की खेती में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग करती थीं। बढ़ती लागत और घटते लाभ के कारण खेती लाभकारी नहीं रह गई थी। इसके साथ ही खेतों की मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित हो रही थी। ऐसे समय में बिहान और कृषि विभाग द्वारा आयोजित किसान गोष्ठियों, कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं तकनीकी मार्गदर्शन ने उनकी खेती की दिशा बदल दी।प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद समूह की महिलाओं ने घनजीवामृत, जीवामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र एवं अग्नियास्त्र जैसे जैविक उत्पादों का निर्माण प्रारंभ किया। इनका उपयोग अपने खेतों में करने से उत्पादन लागत में कमी आई तथा मिट्टी की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ। महिलाओं ने जैविक खेती के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए गांव के अन्य किसानों को भी प्राकृतिक कृषि अपनाने के लिए प्रेरित किया।मातृछाया उत्पादक महिला समूह द्वारा तैयार जैविक उत्पादों एवं खेती के मॉडल को विकासखंड और जिला स्तरीय प्रदर्शनियों में प्रदर्शित किया जाता है, जहां उन्हें सराहना और पहचान मिल रही है। समूह की सदस्याएं नियमित रूप से विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर नई कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त कर रही हैं। समूह की महिलाओं ने बताया कि बिहान और कृषि विभाग के सहयोग से उन्हें एक नई पहचान मिली है। आज वे आत्मविश्वास के साथ सफल महिला किसान के रूप में अपनी भूमिका निभा रही हैं और ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं, बिहान मिशन एवं कृषि विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।
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