लखनऊ, 22 जून 2026। प्रदेश में ‘2026-27 तक कक्षा-3 का हर बच्चा निपुणÓ बनाने के लक्ष्य को साकार करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने निपुण भारत मिशन के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और गति दे दी है। इसी क्रम में बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान (एफएलएन) आधारित पांच दिवसीय राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण का दूसरा चरण सोमवार को इंदिरानगर स्थित स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर के सभागार में शुरू हुआ।प्रशिक्षण के पहले दिन अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए राज्य संदर्भ समूह (एसआरजी) सदस्यों और डायट मेंटरों से संवाद करते हुए कहा कि निपुण भारत मिशन प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि मास्टर ट्रेनर्स इस मिशन की सफलता की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं और कक्षा-कक्ष में होने वाले सकारात्मक बदलाव की नींव इसी प्रशिक्षण से तैयार होगी। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण को केवल औपचारिकता न मानते हुए मिशन मोड में कार्य करने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान और अनुभव को विद्यालय स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना होगा, जिससे बच्चों की आधारभूत भाषा और गणितीय दक्षताओं में अपेक्षित सुधार लाया जा सके। प्रशिक्षण की सफलता तभी मानी जाएगी जब उसका प्रभाव सीधे विद्यार्थियों के सीखने के स्तर पर दिखाई दे।यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्यव्यापी शिक्षक क्षमता संवर्धन अभियान की दूसरी कड़ी है। इससे पूर्व पहला चरण 16 से 20 मई के बीच सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है। वर्तमान चरण में प्रदेश के 20 जनपदों से प्रत्येक जनपद के दो एसआरजी सदस्य और दो डायट मेंटर भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद यही मास्टर ट्रेनर्स जिला और ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों तथा एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) को प्रशिक्षित करेंगे, जिससे निपुण भारत मिशन की अवधारणाएं और नवीन शिक्षण पद्धतियां प्रदेश के अंतिम विद्यालय तक पहुंच सकें।प्रशिक्षण में आधारभूत भाषा एवं गणितीय दक्षताओं के विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है। प्रतिभागियों को दक्षता आधारित शिक्षण, गतिविधि आधारित अधिगम, कैच-अप आधारित शिक्षण प्रक्रिया, टेन प्वाइंट ऑफ टीचिंग, प्रिंट समृद्ध शैक्षणिक वातावरण, शिक्षण-अधिगम सामग्री के प्रभावी उपयोग तथा कक्षा मूल्यांकन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। साथ ही विद्यालयों और शिक्षकों की प्रेरक सफलता कथाओं को भी साझा किया जा रहा है, ताकि नवाचारों को व्यापक स्तर पर अपनाया जा सके।डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दीक्षा पोर्टल, निपुण टीचर ऐप और रीडिंग कैंपेन जैसे डिजिटल संसाधनों के उपयोग पर भी विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यक्रम को पूरी तरह सहभागितापूर्ण और व्यवहारिक स्वरूप दिया गया है, जिसमें प्रदर्शन, समूह चर्चा, सहकर्मी अधिगम, चिंतन और कक्षा में प्रत्यक्ष उपयोग जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।समग्र शिक्षा के वरिष्ठ विशेषज्ञ आनंद पांडेय सहित अन्य शिक्षा विशेषज्ञों ने भी प्रशिक्षण में भाग लिया। कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने और विद्यार्थियों के अधिगम परिणामों में गुणात्मक सुधार लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विद्यालय कायाकल्प, बाल वाटिका, डिजिटल शिक्षण संसाधनों के विस्तार, शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षा की गुणवत्ता सुधार जैसे अनेक प्रयासों के साथ निपुण भारत मिशन को प्रदेश में मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। विभाग का मानना है कि मजबूत आधारभूत शिक्षा ही भविष्य की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सबसे सुदृढ़ नींव है और इसी दिशा में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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