लखनऊ, 22 जून 2026। उत्तर प्रदेश अपनी उपजाऊ भूमि, प्रचुर जल संसाधनों और विविध कृषि उत्पादन क्षमता के बल पर कृषि आधारित उद्योगों का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। गेहूं, धान, गन्ना, आलू, आम और मक्का जैसी फसलों के प्रचुर उत्पादन ने राज्य में खाद्य प्रसंस्करण, कोल्ड स्टोरेज, बीज प्रसंस्करण, जैविक खाद निर्माण तथा पैकेजिंग उद्योगों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। प्रदेश सरकार की नीतियों और प्रोत्साहन योजनाओं के कारण कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।प्रदेश सरकार की खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति के तहत उद्यमियों को पूंजीगत अनुदान, बिजली शुल्क में छूट, स्टाम्प शुल्क में रियायत तथा ब्याज अनुदान जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। खाद्य प्रसंस्करण और कोल्ड स्टोरेज परियोजनाओं पर 35 से 50 प्रतिशत तक पूंजीगत अनुदान दिया जा रहा है। वहीं मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को कम ब्याज दर पर ऋण और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों को प्रति सदस्य 40 हजार रुपये तक कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराकर महिलाओं को भी आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।प्रदेश में गन्ना आधारित उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। गुड़, सिरका, चीनी और शीरा जैसे उत्पादों के निर्माण के लिए प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। गन्ना संस्थान किसानों को आधुनिक तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण तथा सह-उत्पादों के निर्माण का प्रशिक्षण दे रहा है। इससे कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर उसे एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।इन सरकारी प्रयासों का जीवंत उदाहरण जनपद बागपत के ग्राम फैजपुर निनाना के युवा कृषक उद्यमी रूपेंद्र धनकड़ हैं। कभी पारंपरिक तरीके से गन्ने की खेती करने वाले रूपेंद्र ने खेती को मूल्य संवर्धन से जोड़कर सफलता की नई कहानी लिखी है। जिला प्रशासन और कृषि विभाग की संगोष्ठियों से प्रेरित होकर उन्होंने ‘वेदांशी प्राकृतिक उत्पादÓ नाम से अपना ब्रांड स्थापित किया और गन्ने के रस से अनेक अभिनव उत्पाद तैयार किए।रूपेंद्र धनकड़ ने गन्ने के रस से केमिकल-मुक्त आइसक्रीम, कुल्फी, चौदह मसालों वाली गन्ना इमली चटनी, गन्ने के पेड़े, हर्बल चाय, गन्ने के रस की कोल्ड कॉफी और पारंपरिक विधि से निर्मित सिरका जैसे उत्पाद विकसित किए। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच उनके प्राकृतिक उत्पादों को बाजार में अच्छी मांग मिल रही है। कृषि विज्ञान केंद्र से प्राप्त प्रशिक्षण और जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए मंचों ने उनके उद्यम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।फूड प्रोसेसिंग और मूल्य संवर्धन के जरिए रूपेंद्र की मासिक शुद्ध आय अब 60 से 70 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है। उनकी आय किसी एक फसल या मौसम पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि विभिन्न उत्पादों की नियमित बिक्री से पूरे वर्ष बनी रहती है। इससे वे बिचौलियों और बाजार के उतार-चढ़ाव से भी काफी हद तक मुक्त हो गए हैं।रूपेंद्र धनकड़ की सफलता का प्रभाव अब उनके गांव और आसपास के क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। वे विभिन्न संगोष्ठियों और किसान कार्यक्रमों में अपने अनुभव साझा कर अन्य किसानों और युवाओं को कृषि आधारित उद्यम शुरू करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनके प्रयासों से अनेक किसान अब मूल्य संवर्धन और खाद्य प्रसंस्करण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना, कृषि अवसंरचना कोष और एक जनपद एक उत्पाद जैसी योजनाओं के माध्यम से केंद्र और प्रदेश सरकार कृषि आधारित उद्योगों को नई गति दे रही हैं। इन पहलों से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।रूपेंद्र धनकड़ की सफलता यह साबित करती है कि यदि किसानों को सही मार्गदर्शन, आधुनिक प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का सहयोग मिले तो कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि एक सफल उद्यम बन सकती है। उत्तर प्रदेश में कृषि आधारित उद्योगों की यह नई क्रांति किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजित करने और राज्य को कृषि-व्यवसाय का अग्रणी केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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