सिवनी 22 जून (आरएनएस)। सेवा सहकारी समिति भोमा में विक्रेता पद पर कार्यरत रहे स्वर्गीय प्रांजुल हरिनखेड़े की असामयिक मृत्यु के बाद उनकी पत्नी ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है। इस संबंध में उन्होंने सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन को ज्ञापन सौंपकर कई गंभीर आरोपों और संदिग्ध परिस्थितियों की जांच कराने की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया है कि स्वर्गीय प्रांजुल हरिनखेड़े का 3 जून 2026 को निधन हो गया था। उनकी पत्नी का आरोप है कि मृत्यु से पूर्व उनके पति लगभग चार से पांच माह से लंबित वेतन और शासन द्वारा स्वीकृत अतिशेष वेतन वृद्धि (वेतन अंतर) के भुगतान को लेकर लगातार परेशान थे। कई बार अधिकारियों से अनुरोध करने के बावजूद उन्हें समय पर भुगतान नहीं मिला, जिसके कारण वे आर्थिक संकट और मानसिक तनाव से जूझ रहे थे।
परिवार का कहना है कि सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि प्रांजुल हरिनखेड़े के निधन के अगले ही दिन 4 जून को उनका लंबित मूल वेतन जारी कर दिया गया, जबकि वे जीवित रहते हुए लंबे समय से इसके लिए प्रयास कर रहे थे। वहीं अतिशेष वेतन वृद्धि की राशि अब तक लंबित बताई जा रही है। परिवार ने सवाल उठाया है कि यदि भुगतान संभव था तो उनके जीवनकाल में क्यों नहीं किया गया।
ज्ञापन में समिति के प्रशासक दिलीप डेहरिया, कंप्यूटर ऑपरेटर अजय टेमरे तथा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी जितेंद्र हनवत के व्यवहार और कार्यशैली को लेकर भी जांच की मांग की गई है। परिवार का दावा है कि स्वर्गीय हरिनखेड़े ने कई बार इन परिस्थितियों के कारण स्वयं को मानसिक रूप से प्रताडि़त और दबावग्रस्त महसूस करने की बात परिजनों से साझा की थी।
परिजनों के अनुसार मृत्यु से एक रात पहले भी उन्होंने फोन पर बातचीत के दौरान स्वयं को अत्यधिक परेशान और मानसिक दबाव में होने की बात कही थी। ऐसे में परिवार ने उनकी मृत्यु से पूर्व की परिस्थितियों, लंबित भुगतान, प्रशासनिक कार्यप्रणाली तथा संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
पीडि़त परिवार ने विधायक से अनुरोध किया है कि किसी वरिष्ठ अधिकारी अथवा स्वतंत्र एजेंसी से समयबद्ध जांच कराई जाए तथा यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही, मानसिक उत्पीडऩ या कर्तव्यहीनता सामने आती है तो उनके विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए। साथ ही परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए शासन स्तर से आर्थिक सहायता एवं अन्य राहत उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है।
परिवार ने विश्वास जताया है कि मामले की निष्पक्ष जांच होने पर सत्य सामने आएगा और उन्हें न्याय मिल सकेगा।
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