कोलकाता,25 जून(आरएनएस)। कोलकाता के तारातला इलाके में एक दिन पूर्व एक निर्माणाधीन गोदाम के ढह जाने से मरने वालों का आंकड़ा 11 हो गया है. वहीं 20 अन्य घायल हुए हैं.
इस बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को विधानसभा में बताया कि हादसे में मृतकों की संख्या 11 हो गई है. साथ ही उन्होंने इस घटना में जान गंवाने वाले प्रत्येक मृतक के परिवार के लिए 10-10 लाख रुपये और प्रत्येक घायल के लिए एक-एक लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की.
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक बचाए गए 29 लोगों में से 11 की मौत हो गई है. 20 घायलों में से एक की हालत बेहद नाजुक है और चार की हालत गंभीर है. उन्होंने कहा कि पश्चिम कोलकाता के ट्रांसपोर्ट डिपो रोड पर गोदाम ढहने के मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा.
शुभेंदु ने कहा कि इस गोदाम के नक्शे पर पूर्व महापौर फिरहाद हकीम के हस्ताक्षर हैं. एक दिन पहले, मुख्यमंत्री ने कहा था कि कोलकाता नगर निगम के इंजीनियरों से मिली शुरुआती जानकारी से संकेत मिलता है कि गोदाम के लिए स्वीकृत नक्शे में खामियां थीं.
गोदाम ढहने की इस घटना के बाद, उन्होंने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार द्वारा स्वीकृत सभी निर्माणाधीन व्यावसायिक परियोजनाओं के काम को 31 जुलाई तक के लिए रोक दिया है और ऐसी परियोजनाओं के व्यापक ऑडिट का आदेश दिया है.
इस बीच, कंस्ट्रक्शन कंपनी बेहेरा ब्रदर्स के मालिक शंभूनाथ बेहेरा को रात भर की तलाशी के बाद गिरफ्तार कर लिया गया. घटना के बाद से ही कोलकाता पुलिस का खुफिया विभाग उसकी तलाश कर रहा था. पूरी तलाशी और रात भर चले ऑपरेशन के बाद, लालबाजार से आई जांच टीम ने उसे पकड़ लिया. इससे पहले, पुलिस ने मोहम्मद सैयद गुलजार (माना जा रहा है कि वह सुपरवाइजर है), साथ ही लेबर सप्लायर मोहम्मद अताउल और सुभाष चौधरी को भी गिरफ्तार किया था.
पुलिस सूत्रों ने बताया कि लालबाजार के जासूसों ने बुधवार रात न्यू अलीपुर में बेहेरा ब्रदर्स के ऑफिस पर छापा मारा. आरोप है कि शंभूनाथ बेहेरा घटना के बाद से ही छिपा हुआ था. उसके मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रैक करके, जांच करने वालों को पता चला कि वह तारातला इलाके में एक रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स में रह रहा था. हालांकि, शुरू में उसकी सही लोकेशन का पता लगाना मुश्किल था. इसके बाद, पुलिस ने कॉम्प्लेक्स की तलाशी शुरू कर दी. जांचकर्ताओं ने एक के बाद एक लगभग छह फ्लैटों की तलाशी ली.
आखिरकार, पता चला कि अपनी बेटी के फ्लैट में रहने के बजाय, शंभूनाथ बेहरा उसके ठीक सामने वाले फ्लैट में छिपा हुआ था. कहा जाता है कि वह फ्लैट उसके किसी दोस्त का था, जहां आखिरकार उसे ढूंढकर गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस ने जांच के तहत शंभूनाथ बेहरा के दो ड्राइवरों से भी पूछताछ की है. ड्राइवरों के अनुसार, घटना के तुरंत बाद बेहेरा बहुत घबरा गए.
उन्होंने पुलिस को बताया कि घटना वाले दिन, वह डॉक्यूमेंट्स और कई जरूरी फाइलों से भरे दो बैग लेकर ऑफिस से जल्दी-जल्दी निकला था, उसके बाद उसका पता नहीं चला. पुलिस को शक है कि जांच से जुड़े जरूरी डॉक्यूमेंट्स हटाने की कोशिश की गई होगी, इस मामले की अभी जांच की जा रही है.
जांच करने वाले जब्त किए गए डॉक्यूमेंट्स और डिजिटल डेटा के आधार पर यह भी जांच कर रहे हैं कि कंस्ट्रक्शन के काम में कोई लापरवाही हुई थी या नियमों का उल्लंघन हुआ था. बुधवार दोपहर को तारातला में बेहेरा ब्रदर्स की बन रही फैक्ट्री की छत गिर गई थी, जिसमें कई मजदूर मलबे में दब गए थे.
वहीं खबर मिलते ही कोलकाता पुलिस, फायर सर्विस और स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट फोर्स मौके पर पहुंची, जिसके बाद फोर्ट विलियम से आर्मी की स्पेशल रेस्क्यू टीम भी मौके पर पहुंची. इसके बाद एक लंबा बचाव अभियान चला. शुरुआती पुलिस जांच से पता चलता है कि यह हादसा कंस्ट्रक्शन में बड़ी लापरवाही और कंक्रीट कास्टिंग में खराबी की वजह से हुआ होगा. कुछ जांचकर्ताओं का यह भी मानना है कि तूफान और बारिश के कारण स्ट्रक्चर कमजोर हो गया था.
घटना के तुरंत बाद बेहेरा ब्रदर्स की भूमिका पर सवाल उठे, जिसके बाद लालबाजार ने शंभूनाथ बेहेरा के खिलाफ जांच तेज कर दी. जांचकर्ताओं का मुख्य मकसद कंस्ट्रक्शन स्वीकृति, इस्तेमाल किए की गई सामग्री की क्वालिटी, सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन, और क्या हादसे से पहले किसी चेतावनी को नजरअंदाज किया गया था, इस बारे में पूरी जानकारी इक_ा करना है.
पुलिस का मानना है कि शंभूनाथ बेहेरा से पूछताछ से हादसे के पीछे की असली वजह का पता चल जाएगा. जांच करने वालों की शुरुआती पूछताछ में पता चला कि जिस जमीन पर कंस्ट्रक्शन हो रहा था, वह कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट (अब श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट) की है.
यह जमीन बेहेरा ब्रदर्स नाम की फर्म को लगभग 30 साल के लिए लीज पर दी गई थी, और उस जगह पर नई फैक्ट्री का कंस्ट्रक्शन चल रहा था. जांचकर्ता अभी यह देख रहे हैं कि निर्माण से पहले सभी जरूरी स्वीकृति ली गई थी या नहीं और क्या प्रोजेक्ट से जुड़े सुरक्षा नियमों का ठीक से पालन किया गया था.
कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्थिति का जायजा लेने के लिए मौके का दौरा किया. उन्होंने अधिकारियों के साथ बचाव अभियान की प्रगति, घायलों के मेडिकल इलाज और जांच के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा की. पुलिस सूत्रों ने बताया कि तेज़ी से और बिना किसी भेदभाव के जांच करने के निर्देश भी दिए गए हैं.
लालबाजार के एंटी-राउडी सेक्शन को जांच सौंपी गई है. पूछताछ शुरू हो चुकी है, जिसमें फर्म के प्रतिनिधियों के साथ-साथ निर्माण के काम से जुड़े कई लोग भी शामिल हैं. अधिकारी कंस्ट्रक्शन ब्लूप्रिंट, इंजीनियरिंग रिपोर्ट, लीज़ से जुड़े डॉक्यूमेंट्स और प्रोजेक्ट की देखरेख के लिए जि़म्मेदार लोगों की भूमिकाओं की जांच कर रहे हैं.
यह भी पता लगाने के लिए जांच चल रही है कि हादसे के समय कितने मजदूर मौजूद थे, क्या सुरक्षा मानकों का इस्तेमाल किया गया था. पुलिस सूत्रों के अनुसार, कंस्ट्रक्शन के अलग-अलग टेक्निकल पहलुओं को जांचने के लिए एक्सपर्ट की राय ली जा सकती है. सामग्री की क्वालिटी टेस्ट करने के लिए टूटे हुए हिस्से से सैंपल इक_ा करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है.
कोलकाता में निर्माणाधीन गोदाम के ढहने की घटना में जानमाल के नुकसान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों के लिए दो-दो लाख रुपये तथा घायलों के लिए 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही है.
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्सÓ पर एक पोस्ट में कहा, कल कोलकाता में हुई दुर्घटना दुखद है. इस हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी. घायलों को 50-50 हजार रुपये दिए जाएंगे.
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