# यमुना युवक केंद्र ने पुनर्वास के बिना की गई कार्रवाई पर जताई आपत्ति, विस्थापित परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास और ऐतिहासिक अखाड़े के पुनर्निर्माण की मांग
नई दिल्ली , 25 जून (आरएनएस)। यमुना घाटों पर हाल ही में की गई बुलडोजर कार्रवाई के बाद वर्षों से वहां रह रहे सैकड़ों परिवारों के सामने आवास और आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इस कार्रवाई के तहत लगभग 310 परिवारों को उनके निवास स्थानों से हटाया गया, जिससे बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए हैं। प्रभावित परिवारों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्हें बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था या पुनर्वास योजना के विस्थापित किया गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए यमुना युवक केंद्र के महासचिव विजय शंकर चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार द्वारा समय-समय पर “जहां झुग्गी, वहीं मकान” जैसी योजनाओं और वादों की घोषणा की जाती रही है, लेकिन यमुना घाटों पर वर्षों से निवास कर रहे परिवारों के मामले में इन दावों का कोई प्रभाव दिखाई नहीं दिया। उन्होंने कहा कि दशकों से एक स्थान पर रह रहे लोगों को बिना समुचित पुनर्वास के हटाना न केवल मानवीय संवेदनाओं के विपरीत है, बल्कि सामाजिक न्याय की भावना के भी अनुरूप नहीं है।चतुर्वेदी ने बताया कि बुलडोजर कार्रवाई के दौरान घाट नंबर-2 स्थित 80 वर्ष से अधिक पुराने ऐतिहासिक अखाड़े एवं व्यायामशाला “यमुना युवक केंद्र” को भी ध्वस्त कर दिया गया। यह अखाड़ा विश्वप्रसिद्ध दंड-बैठक चैंपियन गुरु धर्मपाल यादव द्वारा स्थापित किया गया था। इसकी स्थापना का उद्देश्य युवाओं को कुश्ती, तैराकी और अन्य खेलों का प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए तैयार करना था।
उन्होंने कहा कि यमुना युवक केंद्र केवल एक अखाड़ा या खेल प्रशिक्षण स्थल नहीं था, बल्कि यह यमुना क्षेत्र की सामाजिक, सांस्कृतिक और खेल परंपराओं का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी था। पिछले कई दशकों में इस संस्थान ने अनेक खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया, जिन्होंने विभिन्न प्रतियोगिताओं में क्षेत्र और देश का नाम रोशन किया। ऐसे ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व के केंद्र का ध्वस्तीकरण स्थानीय नागरिकों, खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के लिए अत्यंत निराशाजनक है। यमुना युवक केंद्र ने सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि यमुना घाटों से विस्थापित किए गए सभी परिवारों के लिए यमुना बाजार तथा आसपास के क्षेत्रों में शीघ्र वैकल्पिक आवास और पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही, क्षेत्र की खेल और सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए ध्वस्त किए गए ऐतिहासिक अखाड़े के पुनर्निर्माण तथा उसके संरक्षण के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएं। संस्था का कहना है कि विकास और सौंदर्यीकरण की योजनाओं के साथ-साथ प्रभावित नागरिकों के पुनर्वास, सम्मानजनक जीवन और सामाजिक सुरक्षा को भी समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए। बिना पुनर्वास के की गई किसी भी कार्रवाई से समाज के कमजोर वर्गों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। संस्था के संयोजक खलीफा अजय यादव मन्नू ने कहा कि यमुना घाटों पर वर्षों से रह रहे परिवारों को बेघर कर देना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से अपील की कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास तथा ऐतिहासिक यमुना युवक केंद्र अखाड़े के पुनर्निर्माण के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं।
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