0-राष्ट्रीय क्वांटम मिशन ने तीन वर्षों में आधे से अधिक लक्ष्य हासिल किए; एनईपी-2020 से तैयार होगी नवप्रवर्तकों और वैज्ञानिकों की नई पीढ़ी
नई दिल्ली, 26 जून(आरएनएस)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्वांटम, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियां आने वाले समय में वैश्विक विकास, आर्थिक प्रगति और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा की दिशा तय करेंगी। उन्होंने कहा कि भारत इन अत्याधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में तेजी से अग्रणी देशों की श्रेणी में स्थान बना रहा है।
एक प्रमुख समाचार चैनल द्वारा आयोजित मीडिया सम्मेलन में अनौपचारिक बातचीत के दौरान डॉ. सिंह ने कहा कि वर्ष 2023 में शुरू किए गए राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (एनक्यूएम) ने मात्र तीन वर्षों में अपने निर्धारित लक्ष्यों में से आधे से अधिक हासिल कर लिए हैं। उन्होंने इसे भारत की वैज्ञानिक क्षमता और उभरती प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
उन्होंने कहा कि क्वांटम-सुरक्षित संचार के क्षेत्र में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसका उपयोग रक्षा, साइबर सुरक्षा, रणनीतिक संचार और संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा में किया जाएगा। साथ ही देश क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार और संबंधित अनुसंधान क्षेत्रों में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आधुनिक विश्व में तकनीकी नवाचार विकास का सबसे बड़ा आधार बन चुका है। जो देश एआई, अंतरिक्ष, परमाणु और क्वांटम जैसी तकनीकों में पीछे रह जाएंगे, वे आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों क्षेत्रों में पिछडऩे का जोखिम उठाएंगे।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह अब केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि शासन, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, अनुसंधान और सार्वजनिक सेवाओं सहित लगभग हर क्षेत्र के लिए अनिवार्य उपकरण बनती जा रही है। उन्होंने बताया कि भारत डिजिटल अवसंरचना, उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग संसाधनों, डेटा केंद्रों और विश्वसनीय ऊर्जा प्रणालियों के विकास पर लगातार निवेश कर रहा है, ताकि एआई आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार मिल सके।
परमाणु ऊर्जा की भूमिका पर उन्होंने कहा कि उन्नत कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत आवश्यक होंगे। ऐसे में स्वच्छ एवं टिकाऊ ऊर्जा के रूप में परमाणु ऊर्जा भारत की प्रौद्योगिकी-आधारित विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
शिक्षा सुधारों का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 को एक परिवर्तनकारी पहल बताया। उन्होंने कहा कि इस नीति ने पारंपरिक और कठोर शिक्षा प्रणाली को लचीले एवं बहुविषयक स्वरूप में बदलकर छात्रों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुरूप शिक्षा एवं करियर चुनने का अवसर प्रदान किया है। इससे अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को नई गति मिलेगी तथा वैज्ञानिकों, नवप्रवर्तकों और तकनीकी विशेषज्ञों की नई पीढ़ी तैयार होगी।
उन्होंने कहा कि सरकार अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित न रहकर विश्वविद्यालयों, उद्योगों, स्टार्टअप और निजी क्षेत्र के सहयोग से एक मजबूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रही है। इससे वैज्ञानिक अनुसंधान के व्यावसायीकरण, नई तकनीकों के विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू नीतिगत सुधारों से अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ी है और एक मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित हुआ है। वहीं, परमाणु क्षेत्र में हाल के सुधार निवेश, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण को नई गति देंगे।
उन्होंने युवाओं से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी के पास ज्ञान, सूचना और आधुनिक शिक्षण संसाधनों तक अभूतपूर्व पहुंच है। यदि युवा इन अवसरों का सही उपयोग करें तो भारत को ज्ञान और नवाचार आधारित वैश्विक नेतृत्व दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
डॉ. सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षा, अनुसंधान, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा तथा उभरती प्रौद्योगिकियों में किए जा रहे सुधार भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को मजबूती देंगे और देश को दुनिया की अग्रणी नवाचार-संचालित अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित करेंगे।
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