0-2,441 क्विंटल धान और 21,982 बारदाने गायब, छह लोगों पर एफआईआर; कांग्रेस ने 60 करोड़ से अधिक घोटाले की आशंका जताई
कवर्धा, 26 जून (आरएनएस)। कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा क्षेत्र में धान खरीदी व्यवस्था में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की संयुक्त जांच टीम के भौतिक सत्यापन में तीन धान खरीदी केंद्रों से 2,441.92 क्विंटल धान और 21,982 खाली बारदाने गायब पाए गए हैं। प्रारंभिक जांच में शासन को करीब 81.19 लाख रुपये की आर्थिक क्षति होने का अनुमान लगाया गया है।
जांच के अनुसार, बासिनझोरी, बिरनपुर कला और सहसपुर लोहारा धान खरीदी केंद्रों में यह अनियमितता सामने आई है। तीनों केंद्रों का संचालन समिति प्रबंधक गंगादास मानिकपुरी के अधीन था। आरोप है कि उन्होंने फड़ प्रभारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के साथ मिलकर धान खरीदी और भंडारण प्रक्रिया में गंभीर गड़बडिय़ां कीं।

भौतिक सत्यापन में बासिनझोरी केंद्र से 585.98 क्विंटल धान और 4,130 बारदाने, बिरनपुर कला से 1,032.36 क्विंटल धान और 5,777 बारदाने, जबकि सहसपुर लोहारा केंद्र से 823.58 क्विंटल धान और 12,075 बारदाने कम पाए गए।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि सैकड़ों तौल पत्रकों में केवल किसानों के हस्ताक्षर थे, जबकि खरीदी प्रभारी, फड़ प्रभारी और तौलकों के हस्ताक्षर वाले कॉलम खाली मिले। जांच दल का मानना है कि जिम्मेदारी से बचने के लिए जानबूझकर आवश्यक हस्ताक्षर नहीं किए गए।
मामले में पुलिस ने समिति प्रबंधक गंगादास मानिकपुरी, सहसपुर लोहारा के फड़ प्रभारी बलदाऊ डड़सेना, कंप्यूटर ऑपरेटर बिहारी राम साहू, बासिनझोरी के फड़ प्रभारी तुकाराम साहू, कंप्यूटर ऑपरेटर पीलूराम साहू तथा बिरनपुर कला के कंप्यूटर ऑपरेटर महावीर साहू के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 316(5) और 3(5) के तहत एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
जांच में यह भी सामने आया कि धान उपार्जन नीति और अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं किया गया। नियमों के अनुसार धान की कमी या भंडारण में गड़बड़ी होने पर खरीदी प्रभारी को तत्काल सक्षम अधिकारियों को लिखित सूचना देना अनिवार्य था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
इस बीच युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2025-26 की धान खरीदी में अनियमितताओं का दायरा और बड़ा हो सकता है। उनका दावा है कि संग्रहण केंद्रों और राइस मिलों के भौतिक सत्यापन की पूरी रिपोर्ट सामने आने पर कथित घोटाला 60 करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है। हालांकि यह दावा विपक्ष की ओर से लगाया गया आरोप है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
धान खरीदी में सामने आई इस अनियमितता के बाद जिले की उपार्जन व्यवस्था, निगरानी तंत्र और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन ने मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और जांच जारी है।
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